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Written By WD Feature Desk
Last Updated : सोमवार, 12 जनवरी 2026 (16:42 IST)

षटतिला एकादशी पर मकर संक्रांति का योग, चावल और तिल का दान करें या नहीं

मकर संक्रांति 2026
Makar sankranti 2026: 23 साल बाद मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग बना है। मकर संक्रांति के दिन तो तिल, गुड़, चावल और खिचड़ी का दान करते और खाते भी हैं, लेकिन एकादशी पर चावाल का दान करना और खिचड़ी खाना मना माना गया है। ऐसे में यह कंफ्यूजन है कि चावल का दान करें या नहीं?
 
वर्ष 2026 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का एक साथ होना बहुत ही दुर्लभ और सौभाग्यशाली संयोग है। एकादशी और संक्रांति दोनों ही दान-पुण्य के लिए महापर्व माने जाते हैं। चूंकि एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित होता है, इसलिए आपके मन में दान को लेकर संशय होना स्वाभाविक है। यहाँ शास्त्र सम्मत समाधान दिया गया है:-
 
1. क्या चावल का दान करना चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है, लेकिन इसका दान करना निषेध नहीं है। हालांकि कई विद्वान बता रहे हैं कि दान भी न करें, दूसरे दिन दान कर सकते हैं। मकर संक्रांति पर 'खिचड़ी' (चावल और दाल का मिश्रण) दान करने का विशेष महत्व है। इसलिए आप दाल और अन्य सामग्री का सीधा (दान सामग्री) जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दे सकते हैं।
 
2. दान और भोजन के नियम (महत्वपूर्ण)
इस विशेष योग में आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
 
दान के लिए: 15 जनवरी को सुबह आप कच्चे चावल और काली उड़द की दाल (खिचड़ी सामग्री) का दान बिना किसी झिझक के करें। यह अक्षय पुण्य देगा।
भोजन के लिए: यदि आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं या नहीं भी रख रहे हैं, तो भी 14 जनवरी को चावल या खिचड़ी का सेवन न करें।
विकल्प: संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा को आप अगले दिन यानी 15 जनवरी (द्वादशी) को पूरा कर सकते हैं। 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद खिचड़ी का सेवन करना शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ होगा।
 
3. षटतिला एकादशी और तिल का महत्व
चूंकि यह षटतिला एकादशी है और मकर संक्रांति भी है, इसलिए इस दिन 'तिल' का महत्व कई गुना बढ़ गया है। आपको इन 6 तरीकों से तिल का उपयोग करना चाहिए:
 
  • तिल के पानी से स्नान।
  • तिल का उबटन लगाना।
  • तिल से हवन।
  • तिल का तर्पण।
  • तिल का दान (सबसे महत्वपूर्ण)।
  • तिल का सेवन (फलाहार के रूप में)।
 
14 जनवरी को आप खिचड़ी (चावल-दाल) का दान भरपूर मन से करें, लेकिन खुद उस दिन चावल का सेवन न करें। संक्रांति का उत्सव और खिचड़ी खाने का आनंद 15 जनवरी को लेना आपके लिए धर्म और परंपरा दोनों दृष्टि से सही रहेगा।