तृणमूल कांग्रेस : ममता दीदी सब पर भारी

पुनः संशोधित शनिवार, 5 फ़रवरी 2022 (19:25 IST)
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वामपंथी दलों को उन्हीं के गढ़ पश्चिम बंगाल में धराशायी कर ममता बनर्जी ने बता दिया कि उन्हें किसी भी सूरत में कमजोर नहीं आंका जा सकता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में एक बार दीदी ने भाजपा करारी शिकस्त देकर दूसरी बार खुद को साबित कर दिया। 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गजों ने ममता के खिलाफ मोर्चा संभाला था, लेकिन भगवा पार्टी को बंगाल में सरकार बनाने में सफलता नहीं मिली।


कांग्रेस से अलग होकर ममता ने 1 जनवरी 1998 को (टीएमसी या एआईटीसी) का गठन किया था। 16वीं लोकसभा में टीएमसी चौथी सबसे बड़ी पार्टी (34 सीटें) बनी, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल के खाते में 22 सीटें आई थीं।

टीएमसी की मुखिया दीदी के नाम से मशहूर ममता बनर्जी हैं, वहीं पार्टी का चुनाव चिह्न 'जोरा घास फूल' है। 2 सितंबर 2016 को चुनाव आयोग ने टीएमसी को राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी। इसका जनाधार प्रमुख रूप से बंगाल में ही है, वहीं यह मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, केरल, हरियाणा आदि राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है।

2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन जिसमें आईएनसी और एसयूसीआई (सी) शामिल थे, ने विधानसभा की 294 सीटों में से 227 सीटें जीतीं। अकेले तृणमूल कांग्रेस ने 184 सीटें जीतीं। बाद में यह आंकड़ा 187 सीटों पर पहुंच गया। ममता से पहले राज्य के मुख्यमंत्री वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्‍टाचार्य थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 213 सीटों पर कब्जा किया।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेलमंत्री रहीं ममता दीदी आज भाजपा की धुर विरोधी हैं। ममता को संगीत, कविताएं लिखने के साथ ही पेंटिंग का भी शौक है। उनकी पेंटिंग्स की नीलामी से पार्टी के लिए अच्छा-खासा फंड इकट्ठा होता है।



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