ज़िंदगी की राहों में
ज़िंदगी की राहों में, रंजो-ग़म के मेले हैं
भीड़ है क़यामत की, फिर भी हम अकेले हैं - सबा अफ़ग़ानी
भीड़ है क़यामत की, फिर भी हम अकेले हैं - सबा अफ़ग़ानी
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