1. लाइफ स्‍टाइल
  2. »
  3. उर्दू साहित्‍य
  4. »
  5. आज का शेर

करता हूँ जमआ फिर

जमआ ग़ालिब
करता हूँ जमआ फिर जिगरे-लख़्त-लख़्त को
अरसा हुआ है दावत-ए-मिज़गाँ किए हुए --------ग़ालिब

जमआ------जमा करना
जिगरे-लख़्त-लख़्त ------टुकड़े-टुकड़े दिल
अरसा-----------समय
दावते-मिज़गाँ----पलकों की दावत
लेखक के बारे में
WD