सिंहासन बत्तीसी : बीसवीं पुतली ज्ञानवती की कहानी

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जहां पदचिन्ह समाप्त होते थे वहां कुल्हाड़ी लिए एक लकड़हारा खड़ा था तथा कुल्हाड़ी से एक पेड़ काट रहा था।

ज्योतिषी ने उसे अपने पांव दिखाने को कहा। लकड़हारे ने अपने पांव दिखाए तो उसका दिमाग चकरा गया। लकड़हारे के पांवों पर प्राकृतिक रूप से कमल के चिन्ह थे।

ज्योतिषी ने जब उससे उसका असली परिचय पूछा तो वह लकड़हारा बोला कि उसका जन्म ही एक लकड़हारे के घर हुआ है तथा वह कई पुश्तों से यही काम कर रहा है। ज्योतिषी सोच रहा था कि वह राजकुल का है तथा किसी परिस्थितिवश लकड़हारे का काम कर रहा है।



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