सिंहासन बत्तीसी : इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति की कहानी

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ने जब यह सुना तो व्याकुल हो गए। उन्होंने राजवैद्य को बुलवाया और जानना चाहा कि उसने महामंत्री की पुत्री की चिकित्सा की है या नहीं?

राजवैद्य ने कहा कि उसकी चिकित्सा केवल ख्वांग बूटी से की जा सकती है। दुनिया की अन्य कोई औषधि कारगर नहीं हो सकती। ख्वांग बूटी एक बहुत ही दुर्लभ औषधि है जिसे ढूंढकर लाने में कई महीने लग जाएंगे।

राजा विक्रमादित्य ने यह सुनकर कहा- 'तुम्हें उस स्थान का पता है जहां यह बूटी मिलती है?'

BBC Hindi|
राज वैद्य ने बताया कि वह बूटी नीलरत्नगिरि की घाटियों में पाई जाती है लेकिन उस तक पहुंचना बहुत ही कठिन है। रास्ते में भयंकर सांप, बिच्छू तथा हिंसक जानवर भरे पड़े हैं। राजा ने यह सुनकर उससे उस बूटी की पहचान बताने को कहा। राजवैद्य ने बताया कि वह पौधा आधा नीला, आधा पीला फूल लिए होता है तथा उसकी पत्तियां लाजवन्ती के पत्तों की तरह स्पर्श से सकुचा जाती हैं।



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