जानिए, परम सिद्ध नौ नाथों को

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चर्पट नाथ : नाथ सिद्धियों की बानियों का संपादन करते हुए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है कि ये चर्पट नाथ के परवर्ती जान पड़ते हैं। इसका संबंध व्रजयानी संप्रदाय से हो सकता है। तिब्बती परंपरा में उन्हें मीनपा का गुरु माना गया है। नाथ परंपरा में इन्हें गोरखनाथ का शिष्य माना जाता है। इनके नाम से प्रसिद्ध बानियों (भजन) में इनके नाम का पता चलता है। ऐसा माना जाता है कि पहले ये रसेश्वर संप्रदाय के थे लेकिन गोरखनाथ के प्रभाव में वे गोरख संप्रदाय के हो गए।

चर्पटनाथ सिद्ध योगी थे। इस संबंध में लेखक नागेंद्रनाथ उपाध्याय ने लिखा है कि सिद्धि प्राप्त करने के बाद अनेक योगी अपने योग बल पर 300-400 से 700-800 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं। नागार्जुन, आर्यदेव, गोरखनाथ, भर्तृहरी आदि के विषय में इसी प्रकार का विश्वास किया जाता है। परिणामत: इन सिद्धों के कालनिर्णय में बहुत सी कठिनाइयां उत्पन्न हो जाती हैं।
चर्पटनाथ ने कहा भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक समय की बात है सभी देवी-देवता शिव-पार्वती के विवाह अवसर पर एकत्रित हुए तब ब्रह्मदेव का वीर्य पार्वती की सुंदरता देखकर गिर गया। उस समय वह वीर्य उनकी एड़ी से कुचला गया। इस तरह यह दो भागों में विभक्त हो गया। एक भाग से 60 हजार संतों का जन्म हुआ और दूसरा भाग और नीचे गिरा और नदी के ईख में अटक गया।

मच्छिंद्र गोरक्ष जालीन्दराच्छ।। कनीफ श्री चर्पट नागनाथ:।।

श्री भर्तरी रेवण गैनिनामान।। नमामि सर्वात सिद्धान।।



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