1. धर्म-संसार
  2. »
  3. धर्म-दर्शन
  4. »
  5. आलेख
  6. भारत भर में नववर्ष की परंपरा का महत्व

The Tradition of new Year | भारत भर में नववर्ष की परंपरा का महत्व

कब-कब होता हैं नववर्ष का शुभारंभ

भारत
भार‍त देश अनेकता में एकता की परंपरा को सहेज रहा है। यहां हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी के साथ अनेक धर्म और समुदायों के लोग अपनी-अपनी संस्कृति को निभाते हुए नया साल मनाते हैं। इन सबके अपने अलग-अलग त्योहार और रीति-रिवाज हैं।

जिस प्रकार सभी समुदायों के कुछ विशेष पर्व हैं जिन्हें सभी एक साथ मिलकर मनाते हैं। उसी प्रकार प्रत्येक समुदाय के नए वर्ष भी अलग-अलग हैं और सभी एक-दूसरे के पर्वों का सम्मान करते हैं। अन्य पर्वों की तरह हर समुदाय के नववर्ष भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं।

आइए जानते हैं उनके बारे में विशेष जानकारी :-

FILE


चैत्र प्रतिपदा : हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ हिन्दी पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है। इसी दिन से वासंतेय नवरात्रि का भी प्रारंभ होता है। हिन्दू नववर्ष का पंचांग विक्रम संवत्‌ से माना जाता है। एक साल में बारह महीने और सात दिन का सप्ताह विक्रम संवत से ही प्रारंभ हुआ है।

FILE



हिजरी सन्‌ : मुस्लिम समुदाय में नया वर्ष मोहर्रम की पहली तारीख से मनाया जाता है। मुस्लिम पंचांग की गणना चांद के अनुसार होती है।



FILE


ओणम : मलयाली समाज में नया वर्ष ओणम से मनाया जाता है। इस दिन प्रतिवर्ष विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। ओणम मलयाली माह छिंगम यानी अगस्त और सितंबर के मध्य मनाया जाता है।




पोंगल : तमिल नववर्ष पोंगल से प्रारंभ होता है। पोंगल से ही तमिल माह की पहली तारीख मानी गई है। पोंगल प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी को मनाया जाने वाला बड़ा त्योहार है। पोंगल में सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है उसे पोंगल कहते हैं।


FILE


गुड़ीपड़वा पर नववर्ष : महाराष्ट्रीयन परिवारों में चैत्र माह की प्रतिपदा को ही नववर्ष की शुरुआत होना माना जाता है। इस दिन बांस में नई साड़ी पहना कर उस पर तांबे या पीतल के लोटे को रखकर गुड़ी बनाई जाती है और उसकी पूजा की जाती है। गुड़ी को घरों के बाहर लगाया जाता है और सुख संपन्नता की कामना की जाती है।

FILE


नववर्ष बैसाखी : खुशदिल लोगों और गीत-संगीत की अनोखी परंपरा से सजी है पंजाबियों की संस्कृति। पंजाबी समुदाय अपना नववर्ष बैसाखी में मनाते हैं। यह त्योहार नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है। बैसाखी के अवसर पर नए कपड़े पहने जाने के साथ ही भांगड़ा और गिद्दा करके खुशियां मनाई जाती हैं। बैसाखी प्रतिवर्ष 13-14 अप्रैल को मनाई जाती है।

FC


नवरोज का प्रारंभ : पारसियों द्वारा मनाए जाने वाले नववर्ष नवरोज का प्रारंभ तीन हजार साल पहले हुआ। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन फारस के राजा जमजेद ने सिंहासन ग्रहण किया था। उसी दिन से इसे नवरोज कहा जाने लगा। राजा जमशेद ने ही पारसी कैलेंडर की स्थापना की थी। नवरोज को जमशेदी नवरोज भी कहा जाता है।

FILE



दीपावली है नया साल : जैन समुदाय का नया साल दीपावली के दिन से माना जाता है। इसे वीर निर्वाण संवत कहा जाता है।



परीवा से नया साल : सभी समुदायों की तरह गुजराती बंधुओं का नववर्ष भी दीपावली के दूसरे दिन पड़ने वाली परीवा के दिन खुशी के साथ मनाया जाता है। गुजराती पंचांग भी विक्रम संवत पर आधारित है। इस दिन एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दी जाती हैं।


बंगाली समुदाय का नया वर्ष : अपनी विशेष संस्कृति से जाने-पहचाने जाने वाले बंग समुदाय का नया वर्ष बैसाख की पहली तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल की कटाई और नया बही-खाता प्रारंभ करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। एक ओर व्यापारी लोग जहां नया बही-खाता बंगाली में कहें तो हाल-खाता करते हैं।