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मेरी माँ
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माँ' जिसकी कोई परिभाषा नहीं,जिसकी कोई सीमा नहीं,जो मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर हैजो मेरे दुख से दुखी हो जाती हैऔर मेरी खुशी को अपना सबसे बड़ा सुख समझती हैजिसकी छाया में मैं अपने आप को महफूज़ समझती हूँ, जो मेरा आदर्श हैजिसकी ममता और प्यार भरा आँचल मुझेदुनिया से सामना करने की शक्ति देता हैजो साया बनकर हर कदम परमेरा साथ देती हैचोट मुझे लगती है तो दर्द उसे होता हैमेरी हर परीक्षा जैसे उसकी अपनी परीक्षा होती है माँ एक पल के लिए भी दूर होती है तो जैसेकहीं कोई अधूरापन सा लगता है हर पल एक सदी जैसा महसूस होता है वाकई माँ का कोई विस्तार नहीं मेरे लिए माँ से बढ़कर कुछ नहीं।नीशी अग्रवाल कक्षा : 9वीं