वो सपना पुराना हो गया
ग़ज़ल
दिनेश कुशवाह दिल को पहलू में सँभाले एक जमाना हो गया, आप कहते हैं कि वो सपना पुराना हो गया।जिसकी चौहद्दी में हर एक आदमी था आदमी, जिसके चलते आँख वाला, हर सयाना हो गया। झूलते हैं लोग अब खुद फाँसियों पर खेत में, देश की सरकार का ये तानाबाना हो गया। बस गए दिल में हमारे सेठ मल्टीनेशनल, बिलबिलाता भूख से, भाई बेगाना हो गया। जिसकी हिस्ट्री शीट पर है वो भी मंत्री बन गया, अब कहाँ दारुलशफ़ा, कस्बे का थाना हो गया। शर्म तो जाती रही ऊपर से ऐसी नंगई, माफियों-डानों के घर में आना-जाना हो गया।