दिल मेरा बेजुबान है
रोहित जैन
दिल मेरा बेजुबान है शायदफासला दरम्यान है शायद उसने बोला है भूल जाऊँ उसे काम कोई आसान है शायद डूबते दिल की शाम ऐसी है जल रहा आसमान है शायद। हम पे सारे सितम नहीं गुजरे वो खुदा मेहरबान है शायद। फकत उनकी ही चाह है दिल को कोई बच्चा नादान है शायद। लब सिलें हैं तो कौन रोता है जख्म की भी जबान है शायद। हिज्र की बात पे वो चुप से हैं इक बड़ी दास्तान है शायद। मैं बुरा हूँ ये तेरे लफ्ज नहीं दुश्मनों का बयान है शायद। इश्क में क्यों मुझे ये लगता है ये कोई इम्तिहान है शायद। जिंदगी रूक गई है अब 'रोहित' उम्र भर की थकान है शायद।