अब तो तोड़ो मौन
- तेजेन्द्र शर्मा
अक्षर के निवास पर गोली बारूद क्यों अधूरा रह जाता है हमारा वजूद?क्या गोली बारूद में अक्षर नहीं होते?हम क्यों रह जाते हैं आधे सोते? हम सच बोलने से कब तक डरेंगे?सच नहीं बोलेंगे तो यूं ही मरेंगे। आतंकवाद का धर्म नहीं होता क्या ये सच है?ये तो सच्चाई पर चढ़ाया गया मात्र एक कवच है। पत्रकार बांए हाथ से लिख कर क्यों खुश रहते हैं?घटना की सच्चाई जान कर भी क्यों चुप रहते हैं?दिखावा ये कि वे सब जानते हैंदाएं हाथ को बस अछूत मानते हैं। विपक्षी उंगली हमेशा क्यों तनी रहती है?सत्ता पक्ष की छोडिए उनकी आपस में ठनी रहती हैसरकार गिराना ही क्यों एकमात्र कर्म है?जनता की कठिनाइयों से आंख मूंदना ही धर्म है। यदि हम सच बोलने से डरते रहे तो पछताना होगाविघटनकारियों के सामने सिर को झुकाना होगा आतंकवाद क्या है, आतंकवादी कौन?उठो और, कम से कम, अब तो तोड़ो मौन।