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Written By ND

30 साल में 25 महिलाएँ

चुनाव 2008
छत्तीसगढ़ विधानसभा में 30 साल में अब तक 25 महिलाएँ ही पहुँच सकी हैं। इनमें से दो नामांकित सदस्य हैं। सबसे ज्यादा 16 कांग्रेस से विधायक रही हैं। भाजपा की मात्र 6 महिलाएँ ही विधानसभा पहुँची हैं। 1993 तक भाजपा से एक भी महिला विधायक नहीं चुनी गईं। वहीं, वर्ष 2003 के चुनाव में कांग्रेस से एक भी महिला विधायक निर्वाचित नहीं हुईं।

अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में पिछले तीन दशक में हुए विधानसभा चुनाव का विश्लेषण करें तो महिलाओं से जुड़े कई रोचक तथ्य सामने आते हैं। जब संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की बात चल रही हो तो यह तथ्य और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वर्ष 1977 से 2003 तक विधानसभा चुनाव के परिणाम का अध्ययन करने से पता चलता है कि राज्य की मात्र 23 महिलाएँ ही विधानसभा पहुँच पाई हैं।

खैरागढ़ क्षेत्र से कांग्रेस की रश्मिदेवी सिंह एकमात्र ऐसी महिला हैं, जिन्होंने चार बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया है। दूसरे क्रम में कांग्रेस की ही गीतादेवी सिंह हैं, जो डोगरगाँव से तीन बार विधायक चुनी गईं।

वर्ष 1977 के चुनाव में तीन महिलाएँ विधायक चुनी गईं। इनमें रायपुर शहर से रजनीताई उपासने (जनता पार्टी), कवर्धा से रानी शशिप्रभा (निर्दलीय) तथा सरिया से कमलादेवी (कांग्रेस) चुनाव जीतीं। इस समय भाजपा अस्तित्व में नहीं थी। 1980 के चुनाव में छः महिलाएँ विधानसभा पहुँचीं। इनमें बैकुंठपुर से देवेंद्र कुमारी, सरिया से कमलादेवी, धमतरी से जयाबेन, भानुप्रतापपुर से गंगा पोटाई, साजा से कुमारीदेवी चौबे व खैरागढ़ से रश्मिदेवी सिंह शामिल हैं।

ये सभी कांग्रेस की हैं। भाजपा से कोई भी महिला विधानसभा नहीं पहुँच पाई थीं। वर्ष 1985 के चुनाव में सबसे ज्यादा आठ महिलाएँ विधानसभा पहुँचीं और वह भी कांग्रेस कीं। इनमें सरिया से कमलादेवी, मुंगेली से दुर्गावती, भाटापारा से कलावती शिवलाल मेहता, कुरूद से दीपा साहू, धमतरी से जयाबेन, भानुप्रतापपुर से गंगा पोटाई, खैरागढ़ से रश्मिदेवी सिंह व कवर्धा से रानी शशिप्रभा सिंह हैं।

वर्ष 1990 और 1993 में केवल दो-दो महिलाएँ विधायक चुनी गईं। इनमें डोंगरगाँव से गीतादेवी सिंह व खैरागढ़ से रश्मिदेवी सिंह हैं। दोनों कांग्रेस की हैं। वर्ष 1998 का चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस चुनाव में ही भाजपा से महिलाओं का खाता खुला। चंद्रपुर से देवी रत्नमाला और कांकेर से श्यामा धु्रवा चुनाव जीतीं। इसके अलावा कांग्रेस से भी चार महिलाएँ विधायक बनीं, जिनमें केशकाल से फूलोदेवी नेताम, चित्रकोट से प्रतिभा शाह, खेरथा से प्रतिमा चंद्राकर व डोंगरगाँव से गीतादेवी सिंह हैं।

इसके अलावा इंग्रिड मैक्लाड नामांकित सदस्य थीं। पिछले चुनाव में 62 महिलाएँ चुनाव मैदान में उतरी थीं। कांग्रेस और भाजपा ने क्रमशः आठ व छः महिलाओं को टिकट दिया था, जबकि अन्य छोटी पार्टियों से 22 महिलाओं ने उम्मीदवारी की थी। इनमें पाँच महिलाएँ ही चुनाव जीतने में सफल हो पाईं।

भाजपा की प्रेमनगर से रेणुकासिंह, सिहावा से पिंकी धु्रव, कोंडागाँव से लता उसेंडी व गुंडरदेही से रमशीला साहू शामिल हैं। एक सीट बसपा की झोली में गई और सारंगढ़ से कामदा जोल्हे विधायक बनीं। इस चुनाव में कांग्रेस की सभी महिला उम्मीदवार चुनाव हार गईं। बाद में कांग्रेस की रेणु जोगी उपचुनाव में कोंटा से निर्वाचित हुईं। इसी तरह एक अन्य महिला विधायक के रूप में रोजलिन बेकमेन नामांकिन हुईं।
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