ऐसे थे बादशाह अकबर के नवरत्न बीरबल

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बीरबल सेनानायक के रूप में अफगानिस्तान की लड़ाई में मारे गए। कहा जाता है कि उनकी मृत्यु ईर्ष्यालु विरोधियों का परिणाम थी। बीरबल की मृत्यु के समाचार से बादशाह को कितना गहरा आघात पहुंचा था।

इसका परिणाम है उनके मुख से कविता के रूप में निकली ये पंक्तियां -
दीन जान सब दीन,
एक दुरायो दुसह दुख,
सो अब हम को दीन,
कुछ नहीं राख्यो बीरबल।



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