आरती श्री गायत्रीजी की ज्ञानद्वीप और श्रद्धा की बाती। सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी को।। आरती... मानस की शुची थाल के ऊपर। देवी की ज्योत जगैं जह नीकी।। आरती... शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा। बाजै करै आसुह ही की।। आरती... जाके समक्ष हमें तिहुं लोक...