- डॉ. शैफाली ओझा
बड़ी उम्र की महिलाएँ कई तरह की समस्याओं से जूझती हैं, बच्चेदानी का बाहर निकल आना (प्रोलेप्स) इनमें एक है। जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है और कब्ज रहता है उनके साथ यह समस्या आम है। फीजियोथेरेपी और सही तरह की कसरतों से इससे बचा जा सकता है लेकिन यदि मूत्रत्याग के समय हर बार बच्चेदानी बाहर आ जाती है तो सर्जरी ही एकमात्र उपाय है।
उदाहरण 1 : मिसेस सिंह (45) को बार-बार पेशाब आने की शिकायत थी जाँच कराने पर मालूम हुआ कि उन्हें प्रोलेप्स है।
उदाहरण 2 : 30 साल की रामप्यारी बाई ने घर में ही पाँचवें बच्चे को जन्म दिया। चार बच्चों की डिलेवरी अनुभवी सास ने कराई थी लेकिन उसके गुजर जाने के बाद हुई डिलेवरी में बहुत मुश्किल हुई। पड़ोसन की मदद ली गई जो खुद जचगी कराने में प्रशिक्षित नहीं थी। बाद में रामप्यारी बाई को प्रोलेप्स हो गया और इस छोटी उम्र में ही मूत्रत्याग के समय उनकी बच्चेदानी बाहर आ जाती थी।
उदाहरण 3 : श्रीमती बड़जात्या (55) का वजन पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा था। उन्हें बरसों से कब्ज की शिकायत थी। उन्होंने लापरवाही से इस समस्या को टाल दिया। अंत में उन्हें प्रोलेप्स हो गया।
हमारी उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, त्वचा ढीली पड़ती जाती है। उसका तनाव और लचीलापन दोनों कम होने लगते हैं। इसी तरह के परिवर्तन आंतरिक अंगों में भी होते हैं। बच्चेदानी का मलमूत्र त्याग करने के समय बाहर आ जाना भी इसी तरह की समस्या है।
उम्र बढ़ने के साथ जब नाभि प्रदेश की मांसपेशियाँ कमजोर होने लगती हैं तब वे गर्भाशय अथवा मूत्र की थैली को यथास्थान रखने में असमर्थ हो जाती हैं। शरीर में कमजोरी की तीव्रता के आधार पर निर्भर है कि कौन-सा अंग अपने स्थान को छोड़ेगा लेकिन हर केस में इतना तय है कि योनि की दीवारें इस तरह पीछे पलट जाती हैं जैसे कोई मोजा उलट गया हो। वैसे तो महिलाओं को कई तरह की समस्याएँ होती हैं लेकिन उम्रदराज महिलाओं में हर आठवीं महिला से एक को बच्चेदानी बाहर निकल आने की शिकायत होती है।
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