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Written By ND

बिंदिया क्या बोले?

वामा
- नरेंद्र देवांगन

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माथे पर सजी बिंदी सिर्फ सौंदर्य प्रसाधन नहीं। न ही यह आधुनिक समाज में सुहाग के चिन्ह के रूप में मौजूद है बल्कि इसने नए आयाम गढ़े हैं और खुद को स्त्री के व्यक्तित्व से जोड़ लिया है। तभी तो जो बिंदी आप लगाती हैं, वह बिना कहे भी बहुत कुछ कह जाती है। क्या आप बिंदिया का यह पक्ष जानती हैं। आइए जानते हैं किस तरह यह छोटी-सी बिंदिया नेत्रियों-अभिनेत्रियों के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए हुए है :

जूलिया राबर्ट्स-
हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स जब ताजमहल देखने आईं तो उनके माथे पर भी लाल रंग की बड़ी-सी बिंदिया चमक रही थी। यह तस्वीर अमेरिका की 'ग्लॉसी मैगजीन' में भी छपी। उनके अमेरिकी फैन भी यह कहे बिना नहीं रह सके कि जूलिया पर इंडियन बिंदिया खूब फबती है।

जूलिया ने एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि 'छोटी-सी बिंदी ने मेरे दिमाग पर गहरा असर छोड़ा है और जब भी मैं लीक से हटकर सँवरना चाहती हूँ तो मुझे भारतीय बिंदी जरूर याद आती है।' आगरा यात्रा के दौरान बिंदी लगाने के एक और कारण के बारे में जूलिया कहती हैं कि 'जब भी मैं किसी भारतीय स्त्री के माथे पर सजी रंग-बिरंगी बिंदी देखती हूँ, मेरी नजरें बरबस ही उस पर ठहर जाती हैं।

अजीब-सा सम्मोहन महसूस होता है। मुझे रश्क होता था कि साधारण शक्लोसूरत के बावजूद ये महिलाएँ इतनी प्यारी क्यों लगती हैं। इसलिए जब मैं भारत आई तो खुद को बिंदी लगाने से रोक नहीं पाई। और सच मानिए इसे लगाते ही ऐसा लगा जैसे मैं बदल गई।

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यह एक अनूठा एहसास था। जब सारी नजरें मुझे देख रहीं थीं, तब सेलिब्रिटी होने के भाव से कहीं ज्यादा यह एहसास प्यारा था कि मेरा चेहरा आज बदला-बदला लग रहा है। एक बिंदी से इतना बड़ा कमाल।'

उषा उत्थुप
विदेश में आयोजित एक म्यूजिक शो में उषा उत्थुप से मिलने एक विदेशी प्रशंसिका आई। तो उसने गीत की तारीफ के बजाए पूछा कि आप ऐसी बिंदी क्यों लगाती हैं? उषा ने जवाब दिया , 'जब मैं बिंदिया लगाती हूँ तो अच्छा गाती हूँ। मतलब! उषा ने हँसते हुए कहा, बिंदिया मेरा आत्मविश्वास दोगुना कर देती है। यह बिंदिया मेरी पहचान है और औरों से अलग दिखने का एक आसान तरीका।'

शोभा डे
शोभा ने बिंदी के बारे में एक बार कहा था, 'अपनी धरती पर हमें बिंदी का बहुत बड़ा प्रभाव नजर नहीं आता। लगभग हर माथे पर बिंदी किसी न किसी रूप में सजी नजर आ ही जाती है। पर, जब हम देश से बाहर जाते हैं तो समझ में आता है कि छोटी-सी बिंदी हमारी संस्कृति और हमारी अस्मिता की पहचान है।

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लोग पूछते हैं आर यू इंडियन? हम हैरान होते हैं कि इन्हें यह पता कैसे चला। तब वे मुस्कुराकर हमारे माथे की ओर इशारा कर कहते हैं 'दैट रेड ब्यूटी स्पाट ऑन योर फोरहेड।' बहुत अच्छा लगता है। गर्व होता है कि हमने बिंदी लगानी नहीं छोड़ी। लोग आज भी हमें इसी खूबसूरत सुहाग चिन्ह से जानते हैं।'

डॉली ठाकुर
जब थिएटर कलाकार डॉली ठाकुर ने धारावाहिक 'क्या होगा निम्मो का' में काम करने को मंजूरी दी तो उनकी पहली शर्त यही थी कि वे बिंदी जरूर लगाएँगी। डॉली का कहना है 'मैंने उस धारावाहिक में काम करने से पहले ही कह दिया था कि अपने स्टाइल स्टेटमेंट को छोड़ना मेरे बस में नहीं।'

जया जेटली
'विल्स लाइफ स्टाइल इंडिया फैशन वीक' के दौरान दर्शक दीर्घा में बैठी जया जेटली भीड़ में बेहद अलग दिख रही थीं। बिंदिया की महिमा पर जया कहती हैं 'बचपन से ही मैंने बिंदिया का साथ कभी नहीं छोड़ा। दक्षिण भारतीय होने के नाते बचपन से ही बिंदिया लगाने का शौक रहा है। मुझे लगता है कि किसी भी महिला के ललाट पर बिंदिया उसकी खूबसूरती पर चार चाँद लगा देती है।'

वृंदा करात, अंबिका सोनी, सुषमा स्वाराज और रेणुका चौधरी के माथे पर लगी कत्थई बिंदिया इन नेत्रियों में गजब का आकर्षण पैदा करती है। वृंदा करात के अनुसार 'अब यह बिंदी उनकी जीवनशैली का अभिन्ना हिस्सा बन गई है। इसके बिना उन्हें कुछ अधूरा-सा लगता है।'

ऐसे ही किरण खेर चाहे किसी भी फिल्म में दिखें, उनकी बिंदी उनका साथ कभी नहीं छोड़ती। नीना गुप्ता ने तो धारावाहिक 'साँस' में अपने व्यक्तिगत स्टाइल स्टेटमेंट को सबकी पसंद बना दिया। आज भी नीना किसी भी समारोह में नजाकत के साथ साड़ी पहने और बिंदी लगाए ही दिखती हैं।

इसी तरह सुधा चंद्रन ने भी एक धारावाहिक में काम करके बिंदी को फैशन स्टेटमेंट बना दिया था। इला अरुण का ट्रेडमार्क भी बिंदी और कलात्मक आभूषण ही है। नृत्यंगना मल्लिका साराभाई की बिंदी भी किसी से कम नहीं। यह कहना गलत नहीं होगा कि लाखों की भीड़ में अपने व्यक्तित्व को अलग दिखाने की चाह में सभी सेलिब्रिटीज नया कदम उठाते हैं।
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