इश्क-मोहब्बत शायरों की नजर में

WDWD
आशिक़ी से मिलेगा ए ज़ाहिद
बन्दगी से खुदा नहीं मिलता ------ दाग़

असद ख़ुशी से मेरे हाथ पाँव फूल गए ----------
कहा जब उसने ज़रा मेरे पाँव दाब तो दे

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
के लगाए न लगे, और बुझाए न बुझे

इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

तुम हो क्या ये तुम्हें मालूम नहीं है शायद
तुम बदलते हो तो मौसम भी बदल जाते हैं

हमारे क़त्ल को मीठी ज़ुबान है काफ़ी
अजीब शख़्स है ख़ंजर तलाश करता है

नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है।----------------- मीर

कम से कम दो दिल तो होते इश्क़ में
एक रखते एक खोते इश्क़ में -----------मीर

सब ग़लत कहते थे लुत्फ़-ए-यार को वजहे-सुकूँ
दर्द-ए-दिल उसने तो हसरत और दूना कर दिया-------हसरत मोहानी

हक़ीक़त खुल गई हसरत तेरे तर्क-ए-की
तुझेतो अबवो पहले से भी बढ़ कर याद आते हैं ---हसरत मोहानी

Meer
Aziz AnsariWD
दिल गया रोनक़-ए-हयात गई
ग़म गया सारी कायनात गई---------जिगर मुरादाबादी

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद
अब मुझको नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद -----जिगर मुरादाबादी

शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो
बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो------------------फ़िराक़

एक मुद्दत से तेरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऎसा भी नहीं -------------फ़िराक़

नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती,
WD|
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं।


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