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शहीद चंद्रशेखर आजाद अपनी शायरी में भी भर देते थे क्रांतिकारी रंग

मंगलवार,जुलाई 23, 2019
Chandra Shekhar Aazad
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होली पर रंगबिरंगी शेरो-शायरी, पढ़ें साहित्यकारों की नजर से।
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जब फागुन के रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की। और डफ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की।
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मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के एक ऐसे शहंशाह हैं जिनका शेर जिंदगी के किसी भी मौके पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है गालिब की कुछ चुनिंदा शायरियां...
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लगाया दांव पर दिल को जुआरी है, मगर हारा कि दिल क्या, जान हारी है। पयामे-यार आना था नहीं आया, कहें किससे कि कितनी बेकरारी है। झुकाकर सर खड़े होना जरूरी सा, जहां सरकार की निकली सवारी है। कभी इक पल नजर थी जाम पर डाली, अभी तक, मुद्दतें गुजरीं, खुमारी ...
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घबराइए मत…! अभी बारिश का मौसम शुरू नहीं हुआ है यह तो इंद्रदेव अपनी पिचकारी चेक कर रहे थे…होली आने वाली है रंगों से नहीं डरे...
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आजाद की क्रांतिकारी शायरी

गुरुवार,जुलाई 23, 2015
चंद्रशेखर आजाद का नाम भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में अमिट है। ऐसा निडर, सहज और निष्कलंक चरित्र वाला इतिहास में कोई दूसरा दिखाई नहीं पड़ता। एक बार कह दिया तो फिर करके दिखाने वाले 'पं. चंद्रशेखर आजाद' को बचपन में एक बार अंग्रेजी सरकार ने 15 ...
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होली की रोमांटिक शायरी

सोमवार,मार्च 2, 2015
होली की रोमांटिक शायरी- नेचर का हर रंग आप पर बरसे। हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे। रंग दे आपको सब मिलकर इतना। कि वह रंग उतरने को तरसे....
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लिपट जाता हूं मां से और मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं, हिन्दी मुस्कुराती है
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नई शायरी : अजब हाल है

मंगलवार,अक्टूबर 22, 2013
कमर बांधे हुए चलने को यों तैयार बैठे हैं, बहुत आगे गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं
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अगर दरिया मिले तो...

बुधवार,सितम्बर 11, 2013
अगर दरिया मिले तो पार करना, सफ़र को और भी दुश्‍वार करना बहादुर हो तो इतना याद रखना, जगाकर दुश्‍मनों पर वार करना
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नई शायरी - फ़ातिहा

शनिवार,अगस्त 31, 2013
तुम्हारी क़ब्र पर मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया, मुझे मालूम था, तुम मर नहीं सकते तुम्हारी मौत की सच्ची खबर
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उसके करम की बात न पूछो...

गुरुवार,जून 13, 2013
उसके करम1 की बात न पूछो वो सबके होले है इक दरवाजा बंद, अगर हो सौ दरवाजे खोले हैं उसकी वाणी लहरों में है, झरनों में हैं उसके बोल उसके ध्यान में डूबके देखो, कानों में रस घोले है
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लफ्जों की बरसात....

शुक्रवार,मई 24, 2013
रात गए लफ्जों1 की बरसात हुई एक मुरस्सा2 नज्म हमारी जात हुई आंधी आई रस्ते में बरसात हुई अपनी मंजिल जैसे अपने साथ हुई छत के ऊपर सावन में भी धूप रही छत के नीचे आंखों से बरसात हुई
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होली की रंगबिरंगी शायरी

सोमवार,मार्च 25, 2013
गुलजार खिले हो परियों के, और मंजिल की तैयारी हो
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किससे जाकर बोले मेरी गजल

गुरुवार,फ़रवरी 28, 2013
जैसा मौका देखे वैसा हो ले मेरी गजल वो बातें जो मैं नहीं बोलूं बोले मेरी गजल चांद-सितारे अर्श1 पे जाके जब चाहें ले आएं ऐसे अदीबोशायर2 से क्यूं बोले मेरी गजल आज खुशी का मोती शायद इसको भी मिल जाए गम की रेत को साहिल-साहिल रौले मेरी गजल...
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अच्‍छाई को बोया कर...

मंगलवार,फ़रवरी 26, 2013
घर से बाहर निकला कर दुनिया को भी देखा कर फसलें काट बुराई की अच्‍छाई को बोया कर ने की डाल के दरिया में अपने आपसे धोखा कर ...
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झूठ का लेकर सहारा जो उबर जाऊंगा मौत आने से नहीं शर्म से मर जाऊंगा सख्त1 जां हो गया तूफान से टकराने पर लोग समझते थे कि तिनकों सा बिखर जाऊंगा...
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बादल दरिया पर बरसा हो, ये भी तो हो सकता है खेत हमारा सूख रहा हो, ये भी तो हो सकता है मंजिल से वो दूर है अब तक शायद रास्ता भूल गया घबराकर घर लौट रहा हो, ये भी तो हो सकता है...
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जो मंजर तलाश करता है....

सोमवार,अक्टूबर 29, 2012
जो फन में फिक्र के मंजर तलाश करता है वो राहबर भी तो बेहतर तलाश करता है न जाने कौन सा पैकर तलाश करता है फकीर बनके वो घर-घर तलाश करता है ....
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