हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा
हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,
ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू------ अहमद फ़राज़
ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू------ अहमद फ़राज़
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