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Aaj ka sher | चाहतों का वजूद
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद,
अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इज़हार नहीं करते - अज्ञात
अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इज़हार नहीं करते - अज्ञात
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