अमेरिका का दावा, अफगानिस्तान में IS के 2000 लड़ाके, एयरपोर्ट पर तालिबान का कब्जा

पुनः संशोधित मंगलवार, 31 अगस्त 2021 (12:48 IST)
वाशिंगटन। अमेरिकी सेना ने भले ही छोड़ दिया हो लेकिन जिस के सफाए के लिए उसने यहां कदम रखा था वह अभी खत्म नहीं हुआ है। अफगानिस्तान में फिलहाल 2000 के करीब लड़ाके मौजूद है। इस बीच अमेरिकी सेना के जाते ही काबुल एयरपोर्ट पर ने कब्जा कर लिया।
अमेरिकिन सेंट्रल कमांड के कमांडर केनेथ मैकेंजी ने दावा किया कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादी समूह के करीब 2,000 लड़ाके हैं।

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही काबुल एयरपोर्ट IS के निशाने पर है। हवाईअड्डे के बाहर इस खूंखार आतंकी संगठन द्वारा किए गए हमलों में अमेरिकी बल के 13 सदस्य और कम से कम 169 अफगान मारे गए थे।

जिहादी समूह ने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर कहा था कि इस हमले को उसने अंजाम दिया। आईएसआईएस ने आत्मघाती हमलावर की पहचान अब्दुलरहमान अल-लोगरी के तौर पर की और कहा कि जब उसने आत्मघाती जैकेट में विस्फोट किया तो वह अमेरिकी सैनिकों से पांच मीटर से भी कम दूरी पर था।
काबुल एयरपोर्ट पर भी तालिबान का कब्जा : अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की पूर्ण वापसी के बाद तालिबान ने काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है।

इस दौरान हवाई क्षेत्र के उत्तरी सैन्य हिस्से में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एकमात्र रनवे के पास कुछ वाहन चलते नजर आए। भोर होने से पहले, भारी हथियारों से लैस तालिबान के लड़ाके ‘हैंगर’ के पास पहुंचे और अमेरिका विदेश मंत्रालय द्वारा निकासी अभियान में इस्तेमाल किए गए सात ‘सीएच -46’ हेलीकॉप्टरों वहां से रवाना होते हुए देखा।
इसके बाद, अपनी जीत का जश्न मनाते हुए तालिबान नेता प्रतीकात्मक रूप से रनवे पर चले। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि दुनिया ने सबक सीख लिया और यह जीत का सुखद क्षण है।

अमेरिकी सेना के सोमवार देर रात करीब 20 साल बाद अफगानिस्तान में अपनी सैन्य मौजूदगी पूरी तरह खत्म करने के बाद तालिबान लड़ाकों ने जीत का जश्न मनाने के लिए वहां हवा में गोलियां चलाईं।

20 साल बाद अमेरिका को दी मात : लोगार प्रांत से हवाईअड्डे पर तैनात तालिबान का एक सुरक्षा कर्मी मोहम्मद इस्लाम हाथ में ‘कलाश्निकोव राइफल’ लिए दिखा। उसने कहा कि 20 साल बाद हमने अमेरिकियों को मात दे दी। यह स्पष्ट है कि हमें क्या चाहिए। हम शरिया (इस्लामिक कानून), शांति और सौहार्द चाहते हैं।





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