जोई की निगाहें ओलिम्पिक स्वर्ण पर

नई दिल्ली| WD| Last Updated: गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019 (20:14 IST)

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इंग्लैंड की जोई स्मिथ को देखकर यकीन नहीं होता कि वे इंग्लैंड की जानी-मानी वेटलिफ्टर हैं और ब्रिटिश ओलिम्पिक एसोसिएशन द्वारा "एथलीट ऑफ द ईयर" जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं। इंग्लैंड को कॉमनवेल्थ गेम्स में इस 16 वर्षीय स्कूली छात्रा से वेटलिफ्टिंग के 58 किग्रा वजन वर्ग में पदक की उम्मीद है।
जोई ने तो अपनी निगाहें 2012 के लंदन ओलिम्पिक के स्वर्ण पदक पर टिका रखी हैं और कॉमनवेल्थ गेम्स को तो वे पहले पड़ाव के रूप में ले रही हैं। जोई 14 वर्ष की उम्र में वेटलिफ्टिंग में 98 ब्रिटिश रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं तथा अपने वजन से तिगुना वजन उठाने की उपलब्धि भी अर्जित कर चुकी हैं।

जोई ने इस प्रतिनिधि से चर्चा में कहा कि मैं कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने को लेकर आश्वस्त हूँ, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि कौनसा पदक मिलेगा। मुझे ऑस्ट्रेलिया तथा भारत की वेटलिफ्टरों से कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। वैसे मेरा मुकाबला अपने आप से होता है और यदि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया तो पदक जीतना तय है।

पुणे में 2008 में हुए युवा कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में 53 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुकीं जोई प्रारंभ में जिम्नास्टिक्स से जुड़ी हुई थीं, लेकिन 4 वर्ष पूर्व लंदन यूथ गेम्स के लिए वेटलिफ्टिंग टीम में सदस्य कम पड़ने पर उनका नाम इस टीम में जोड़ा गया था। इसी कदम ने उनकी जिंदगी की राह बदल दी। जोई ने सुप्रसिद्ध कोच एंडी केलार्ड के मार्गदर्शन में इस खेल की बारीकियाँ सीखना प्रारंभ कीं और देखते ही देखते वे ब्रिटेन की सबसे शक्तिशाली वेटलिफ्टर बन गईं। उनके करियर का अभी तक का सबसे सुखद क्षण तब आया था जब वर्ष 2008 में उनके प्रदर्शन के लिए ब्रिटिश ओलिम्पिक एसोसिएशन ने उन्हें "एथलीट ऑफ द ईयर" अवॉर्ड के लिए चुना, आमतौर पर यह सम्मान ओलिम्पिक पदक विजेताओं को प्रदान किया जाता है।

दक्षिण-पूर्व लंदन की निवासी जोई का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन क्लिन एंड जर्क में 110 किग्रा तथा स्नैच में 86 किग्रा है। वेलेंसिया (स्पेन) में संपन्न योरपियन वेटलिफ्टिंग यूथ चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुकीं जोई का असली लक्ष्य तो अपने शहर में 2012 में होने वाले ओलिम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का है और उन्हें लगता है कि यदि वे इसी तरह अपने कदम आगे बढ़ाती रहीं तो उनके लिए मंजिल को हासिल करना मुश्किल नहीं है। वे कॉमनवेल्थ गेम्स को पहले पड़ाव के रूप में ले रही हैं, क्योंकि इसमें उन्हें सीनियर वर्ग की वेटलिफ्टरों का सामना करना पड़ेगा।

जोई को भारत बेहद पसंद है क्योंकि पिछली बार वे भारत से स्वर्णिम सफलता के साथ स्वदेश वापस लौटी थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वेटलिफ्टिंग के लिए समय निकाल पाना मुश्किल होता है, लेकिन वे इसमें सामंजस्य बैठा लेती हैं। वेटलिफ्टिंग के बाद जिम्नास्टिक्स उनका दूसरा पसंदीदा खेल है और खाली समय में वे इससे मन बहला लेती हैं।

 

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