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विशाला-
महादेव ने पार्वती की इच्‍छानुसार इस विशाल पुरी का निर्माण किया और कहा कि यह नगरी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली होगी। इसमें पुण्यात्मा, देवर्षि तथा महर्षिजनों का निवास होगा। यहां सभी प्रकार के पशु-पक्षियों तथा पुष्पों एवं फलों से युक्त उपवन एवं स्वर्ण, मणि तथा मुक्ताओं से गुम्फित तोरणद्वार वाले विशाल प्रासाद होंगे। इस प्रकार यह नगरी हर प्रकार की समृद्धि और वैभव से युक्त हो गई तथा विशाला नाम से प्रख्यात हुई।
'विशाला बहुविस्तीर्णा पुण्या पुण्यजनाश्रया' से स्पष्ट है कि यह अन्य नगरियों की अपेक्षा विस्तीर्ण थी। कालिदास ने मेघदूत में 'श्रीविशालां विशालां' के पुनरुक्ति प्रयोग द्वारा उसकी विशालता की मधुर कल्पना की।



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