sundarkand

शरद पूर्णिमा पर जानिए चांद की सोलह कलाएं और उनका महत्व

जानिए हिन्दू धर्म के अनुसार चंद्रदेव की कलाओं के अर्थ

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 15 अक्टूबर 2024 (08:51 IST)
Sharad Poornima

हिन्दू धर्म में चंद्रमा को एक महत्वपूर्ण ग्रह और देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं, जो उसके पूर्ण स्वरूप को दर्शाती हैं। यह कलाएं चंद्रमा की पूर्णता, सौंदर्य और उसकी शक्तियों का प्रतीक हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि ये सोलह कलाएं कौन सी हैं और उनका धार्मिक महत्व क्या है।

सोलह कलाओं का अर्थ और महत्व
चंद्रमा की सोलह कलाएं उसकी पूर्णता का प्रतीक मानी जाती हैं। इन कलाओं को भगवान श्रीकृष्ण ने भी धारण किया था, जो इस बात का संकेत देती हैं कि यह कलाएं न केवल प्रकृति से जुड़ी हैं बल्कि आत्मज्ञान और पूर्णता का भी प्रतीक हैं। हर कला चंद्रमा की एक विशेष स्थिति को दर्शाती है और व्यक्ति के जीवन में विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है।

चंद्रमा की सोलह कलाएं कौन-कौन सी हैं?
चंद्रमा की सोलह कलाओं के नाम इस प्रकार हैं:

1. अमृता
यह कला अमृत की धारा से जुड़ी मानी जाती है, जो जीवन को अमरत्व का संदेश देती है।

2. मनदा
मन को स्थिर और शांत रखने वाली शक्ति से जुड़ी यह कला चंद्रमा की शीतलता का प्रतीक है।
3. पुष्टि
यह कला शरीर और मन को पोषण और शक्ति प्रदान करती है।

चांद की सोलह कलाएं जीवन में धन, समृद्धि और वैभव को आकर्षित करने वाली शक्ति से संबंधित है।

5. तुष्टि
संतोष और शांति की भावना उत्पन्न करने वाली शक्ति को दर्शाती है।

6. धृति
धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक मानी जाती है।

7. शशिनी
यह कला चंद्रमा की चमक और उसकी ऊर्जा का प्रतीक है।

8. धरा
पृथ्वी पर जीवन के पोषण से संबंधित यह कला अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

9. कांति
चंद्रमा की आभा और सौंदर्य का प्रतीक है।

10. ज्योत्स्ना
चंद्रमा की शीतल, हल्की रोशनी का प्रतीक है।

11. सुधा
यह कला अमृत की तरह जीवन को ऊर्जा प्रदान करती है।

12. चंद्रिका
चंद्रमा की रोशनी से जुड़ी यह कला जीवन में नई दिशाओं का संकेत देती है।

13. कान्ति
आकर्षण और सौंदर्य की कला है।

14. ज्योति
चमक और तेजस्विता का प्रतीक है।

15. स्मृति
याददाश्त और अनुभवों को संचित रखने की शक्ति।

16. वपु
शरीर की सुंदरता और उसके स्वास्थ्य से संबंधित यह कला मानी जाती है।

क्या है चन्द्रमा की सोलह कलाओं का जीवन में प्रभाव
चंद्रमा की सोलह कलाएं हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती हैं। यह कलाएं मानसिक शांति, संतुलन, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति से संबंधित हैं। हिन्दू धर्म में इन कलाओं का ध्यान और पूजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि व्यक्ति जीवन में संतुलन और समृद्धि प्राप्त कर सके।

अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

 

 
लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

सूर्य-शनि का नवपंचम योग: इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, सफलता के खुलेंगे नए रास्ते

06 August Birthday: आपको 6 अगस्त, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (6 अगस्‍त, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 06 अगस्‍त 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

सावन का दूसरा सोमवार 2026: कब है, क्या रहेगा शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि?

अगला लेख