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Written By श्रुति अग्रवाल

कुदरत की खूबसूरत इबारत केरल

कुदरत की खूबसूरत इबारत केरल - कुदरत की खूबसूरत इबारत केरल
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केरल कुदरत की खूबसूरत इबारत... जिसकी नैसर्गिक खूबसूरती की कल्पना करना मुश्किल है। समंदर का जितना खूबसूरत रूप आपको केरल में देखने को मिलेगा, उतना हिंदुस्तान की बात छोड़िए, पूरी दुनिया में कहीं और नहीं मिलेगा।

आपकी नजरें जहाँ जाएँगी, बस एक ही रंग उन्हें कैद करेगा - हरा। जी हाँ, केरल में इतनी हरियाली है कि समुद्र का पानी भी हरा ही दिखता है (पेड़ों की छाया के कारण)। खूब दूर-दूर तक फैले खेत, छोटे-छोटे लेकिन साफ-सुथरे गाँव, बेहद खुशनुमा जीवन और ढेर सारे पारंपरिक पकवान यहाँ की खासियत है। यहाँ के सीधे-सादे गाँव वाले भले ही हिंदी-अँग्रेजी ज्यादा न बोलें, लेकिन मेहमाननवाजी में किसी से कम नहीं।

 
खूब दूर-दूर तक फैले खेत, छोटे-छोटे लेकिन साफ-सुथरे गाँव, बेहद खुशनुमा जीवन और ढेर सारे पारंपरिक पकवान यहाँ की खासियत है। यहाँ के सीधे-सादे गाँव वाले भले ही हिंदी-अँग्रेजी ज्यादा न बोलें, लेकिन मेहमाननवाजी में किसी से कम नहीं।
यहाँ आपको हरे-भरे पहाड़, नारियल, रबर तथा मसालों के पेड़-पौधे व कुछ स्थानों पर चाय के बागान भी मंत्रमुग्ध कर देंगे। केरल की बेहद उपजाऊ भूमि ही यहाँ की हरियाली का कारण है। यहाँ भारत के सबसे अच्छे समुद्र तटों में से एक 'कोवलम बीच' का आकर्षण पर्यटकों की भीड़ को खींचता है। साथ ही सुंदर मंदिर और अनूठी परंपराएँ भी आपको मोहित कर देती हैं।

ऐतिहासिक दृष्टि से केरल में 10वीं शताब्‍दी ईसा पूर्व से मानव के बसाव के प्रमाण मिले हैं। केरल उन स्थानों में से एक है, जहाँ ईसाई धर्म शुरुआती रूप में हिंदुस्तान में फैला। इसलिए यहाँ इस धर्म से जुड़े कई प्राचीन हस्ताक्षर हैं, जिनमें से 200 साल पुराना सेंट जार्ज आर्थोडाक्स चर्च प्रमुख है।
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प्रमुख आकर्षण-
कोचीन (कोच्चि) तथा एर्नाकुलम - अरब सागर के तट पर बसा केरल का बेहद खूबसूरत शहर है कोच्चि। यह एक बड़ा औद्योगिक व व्यापारिक केंद्र है। इसके साथ ही यहाँ विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक हार्बर भी है। कोच्चि के लिए एप्पसी से कार द्वारा जाया जा सकता है। इसके अलावा पूरे देश से यह जगह हवाई और रेल मार्ग से जुड़ी हुई है। पुर्तगालियों ने कोच्चि गाँव को बसाया था। कोच्चि में आपको 500 साल पुराने पुर्तगाली अवशेष मिलेंगे। यहाँ आप भारत का एक बहुत पुराना चर्च भी देख सकते हैं।

प्रसिद्ध कथकली नृत्य के लिए भी इसे जाना जाता है। यहाँ समुद्र में अनेक द्वीप हैं, जो विभिन्न पुलों द्वारा नगर से जुड़े हुए हैं। इन पुलों के एक सिरे को ही एर्नाकुलम कहते हैं। अर्थात एर्नाकुलम व कोच्चि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कोचीन में आप बोलघट्टी व विलिंगडन द्वीप, थंपूरन संग्रहालय, डच पैलेस, यहूदी सिनेगाग, सेंट फ्रांसिस चर्च, सांताक्रूज कैथेड्रल आदि देख सकते हैं।

यहाँ समुद्र में अनेक द्वीप हैं, जो विभिन्न पुलों द्वारा नगर से जुड़े हुए हैं। इन पुलों के एक सिरे को ही एर्नाकुलम कहते हैं। अर्थात एर्नाकुलम व कोच्चि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कोचीन व एर्नाकुलम में आसपास देखने लायक अन्य स्थान हैं -
त्रिचुर नमट्टनशेरी, गुंडू आयलैंड, थेकड़ी, राष्ट्रीय वन्य प्राणी उद्यान, कोट्टायमनपेरियार वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, मंगलादेवी का मंदिर, अलप्पे, क्विलोन, गुरुवयूर, कालड़ी आदि।

त्रिवेंद्रम या तिरुअनंतपुरम - केरल की यह राजधानी कई अनुसंधान केंद्रों हेतु प्रसिद्ध है। इस नगर को महात्मा गाँधी ने ‘सदाबहार नगर’ की उपमा दी थी। पर्यटकों के यहाँ आने का प्रमुख कारण कोवलम बीच, जहाँ से श्रीलंका या मालदीव के लिए जाना भी होता है। कोवलम बीच की नैसर्गिक सुंदरता देखते ही बनती है। यह केरल से लगभग 16 किलोमीटर दूर पड़ता है। इस बीच की गहराई बेहद कम है। इसलिए गाइड की निगरानी में आप यहाँ जी भरकर अठखेलियाँ कर सकते हैं।

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कोवलम में तीन बेहद खूबसूरत अर्ध चंद्राकार बीच हैं। इसके साथ ही कोवलम में आप आयुर्वेदिक मसाज का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा पोनमुद्री पर्वतीय स्थान तथा तीर्थ स्थान वरकला भी यहाँ के मुख्य आकर्षणों में हैं। यहाँ आपको पद्मनाभस्वामी का मंदिर, संग्रहालय व प्राणी उद्यान, सबरीमला हिल, नय्यर बाँध आदि देखने को मिलेंगे।

त्रिवेंद्रम के आसपास के भ्रमण स्थ
कन्या कुमारी, पद्मनाभपुरम पैलेस, लक्षद्वीप आदि।

केरल के अन्य प्रमुख भ्रमण स्थल
कालीकट या कोझीकोड, पेरियार, पीरमेड पर्वत माला, मुन्नार, वारकला, कप्पड़ आदि।
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कब जाएँ - मई, जून को छोड़कर वर्ष भर जा सकते हैं। अक्टूबर से अप्रैल तक का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

कैसे जाएँ - दक्षिण भारत के लिए आप हवाई यात्रा द्वारा बड़े शहरों (कोच्चि व बंगलोर आदि) तक जा सकते हैं। ट्रेन सबसे अच्छा व सस्ता साधन है। बस, टैक्सी या स्वयं का वाहन भी चुन सकते हैं। त्रिवेंद्रम के लिए देश के अन्य भागों से सड़क मार्ग द्वारा आवागमन सुलभ है।

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कहाँ ठहरें- अधिकांश स्थानों पर आपको सस्ते होटल व लॉज मिल जाएँगे। तीर्थ स्थानों पर कुछ धर्मशालाओं की भी सुविधा है। वहीं कुछ हिल स्टेशनों पर कॉटेज की भी व्यवस्था है। यहाँ कई रिसॉर्ट ऐसे हैं, जहाँ पाँच सितारा होटलों की सुविधाएँ हैं। साथ ही यहाँ आयुर्वेदिक उपचार केंद्र भी बनवाए गए हैं।

बजट- यह ऐसी जगह है, जहाँ व्यक्ति अपनी जेब के हिसाब से भरपूर लुत्फ उठा सकता है। यहाँ कई टूरिज्म कंपनियाँ पैकेज टूर चलाती हैं। जैसे केरला बैक वॉटर पैकेज, हनीमून पैकेज, बीच टूर पैकेज आदि जिनका बजट लगभग पाँच हजार से शुरू होकर आपकी जेब की क्षमता तक जाता है।

पारंपरिक हाउसबोट में रहने और तैरती हाउसबोट पर पारंपरिक दक्षिण भारतीय भोजन का लुत्फ उठाने का मजा ही कुछ और है। इसका खर्च सात हजार से बारह हजार के बीच आता है। या फिर 300 से 500 रूपए में बोट से घंटा भर बैकवॉटर का खूबसूरत दृश्य निहारिए।
यदि आप ज्यादा खर्च में विश्वास रखते हैं तो यहाँ कई आलीशान रिसॉर्ट हैं, जहाँ आप केरल के आयुर्वेदिक उपचार का आनंद भी ले सकते हैं। यदि जेब हल्की हैं तो कई धर्मशालाएँ इंतजार करती नजर आएँगी। इसके अलावा हाउसोट पर रहने का मौका मत गँवाइएगा।

मानचित्र में स्थिति - भारत के दक्षिण भाग के खूबसूरत प्रांत का नाम है केरल। अरब सागर के तट पर बसा होने के कारण यहाँ से दूसरे उपमहाद्वीपों तक जाने का समुद्री रास्ता जुड़ा है।
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टिप्स-
1. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि यहाँ मई-जून के महीने में मानसून दस्तक देता है। इसलिए इन महीनों में केरल न जाएँ। यदि मूसलधार बारिश देखने के शौकीन हों तो बारिश से बचने के जरूरी उपाय जैसे रेनकोट, छाता, लाँग बूट आदि साथ में रख लें। मई-जून से लगे महीनों में केरल घूमने का इरादा हो तो हल्की बारिश से बचने के लिए जरूरी सामान साथ रखें।

2. यहाँ आपको पारंपरिक स्वादों से भरपूर दक्षिण भारतीय भोजन का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। हमारी माने तो बढ़िया रेस्त्राँ में भोजन खाने से अच्छा होगा, सड़क किनारे लगी दुकानों में सजे पकवानों का लुत्फ लें। ये सस्ते होने के साथ ही पारंपरिक स्वाद से भरपूर होंगे। यह स्वाद आपको यहाँ के सिवाय कहीं और नहीं मिलेगा।

3. आप यहाँ से पारंपरिक स्थानीय वस्त्र (जरी की साड़ी की यहाँ भरमार है। आप अपनी पसंद और जेब के हिसाब से खरीदारी कर सकते हैं), ताजे मसाले, चाय और लकड़ी से बनी सुंदर आकृतियों को यादगार के रूप में खरीद सकते हैं। हमारी माने तो यहाँ भी बड़ी दुकानों की जगह छोटे कारीगरों के ठेले से खरीदारी करें और मोलभाव का ध्यान रखें।

4. केरल में घूमते समय पहनावा सूती रखें तो बेहतर होगा। समुद्र का किनारा होने के कारण यहाँ उमस वाली गरमी होती है। सिर के लिए टोपी, चश्मा और अच्छे सनस्क्रीन लोशन साथ ले जाना अच्छा होगा।

5. केरल घूमने जाने से पहले देशी-विदेशी यात्री यहाँ संपर्क कर सकते हैं।

Department of Tourism, Government of Kerala
Park View, Thiruvananthapuram, Kerala, India - 695 033
Phone: +91-471-2321132 Fax: +91-471-2322279
Tourist Information toll free No:1-800-425-4747
Email: