क्यों आज भी जीवित हैं हनुमानजी?

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आप सोच रहे होंगे हनुमान तो त्रेतायुग में हुए फिर सतयुग में वे कैसे हो सकते हैं? इसका जवाब है कि इस युग में पवनपुत्र भगवान श्रीशंकर के स्वरूप से विश्व में स्थित थे, तभी तो उन्हें शिवस्वरूप (आठ रुद्रावतारों में से एक) लिखा और कहा गया है। तभी तो गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा में उन्हें शंकर सुवन केसरी नंदन कहकर संबोधित किया है।

त्रेतायुग में जब-जब ने हनुमानजी को गले से लगाया, तब-तब भगवान शंकर अति प्रसन्न हुए हैं। सतयुग में भोलेनाथ पार्वती से उनके स्वरूप का वर्णन करते हैं और वे उसी युग में पार्वती से दूर रहकर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। अत: यह प्रमाणित है कि श्रीहनुमानजी सतयुग में शिवरूप में थे और शिव तो अजर-अमर हैं।
WD| Last Updated: गुरुवार, 26 मार्च 2015 (17:03 IST)

तीसरे पन्ने पर, राम के काल त्रेतायुग में हनुमान के होने का रहस्य...




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