भारत के महान चक्रवर्ती सम्राटों की दास्तान

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
हमें फॉलो करें
त्रेतायुग में अर्थात भगवान राम के काल के हजारों वर्ष पूर्व प्रथम मनु स्वायंभुव मनु के पौत्र और प्रियव्रत के पुत्र ने इस भारतवर्ष को बसाया था। भारत से पूर्व भारत का नाम नाभिराज के नाम पर अजनाभवर्ष और उससे पूर्व हिमवर्ष था।
 
FILE
प्राचीन भारत के नौ खंड थे इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गंधर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है। इस संपूर्ण क्षेत्र का महान सम्राट भारत के पिता, पितामह और भारत के वंशों ने बसाया है।> > इस भारतवर्ष में पहले देव, असुर, गंधर्व, किन्नर, यक्ष, मानव, नाग आदि जातियां निवास करती थीं। इस भारत में कुरु, पांचाल, पुण्ड्र, कलिंग, मगध, दक्षिणात्य, अपरांतदेशवासी, सौराष्ट्रगण, तहा शूर, आभीर एवं अर्बुदगण, कारूष, मालव, पारियात्र, सौवीर, संधव, हूण, शाल्व, कोशल, मद्र, आराम, अम्बष्ठ और पारसी गण रहते थे। भारत के पूर्वी भाग में किरात (चीनी) और पश्चिमी भाग में यवन (ग्रीक) बसे हुए थे।
बाद में भारत में कृष्ण के काल में ये जनपद रहे:- अंग, अवंति, अश्मक, कंबोज, काशी, कुरु, कोशल, गांधार, चेदि, पंचाल, मगध, मत्स्य, मल्ल, वज्जि, वत्स और शूरसेन। हर काल में ये जनपद बदलते रहे। लेकिन जिस व्यक्ति ने उक्त संपूर्ण जनपदों पर राज किया वही चक्रवर्ती सम्राट कहलाया।

मूल रूप से प्राचीन भारत में अयोध्या कुल, यदु कुल, पौरव कुल और कुरुवंश का शासन था लेकिन इनके अलावा दिवोदास (काशी), दुर्दम (हैहय), कैकय (आनव), गाधी (कान्यकुब्ज), अर्जुन (हैहय), विश्वामित्र (कान्यकुब्ज), तालजङ्घ (हैहय), प्रचेतस् (द्रुह्यु), सुचेतस् (द्रुह्यु), सुदेव (काशी), दिवोदास द्वितीय और बलि (आनव) का भी राज्य शासन रहा।

नोट : उक्त सब राज्य और राजाओं से पहले देव और दैत्य के राजा होते थे, जिसमें इंद्र और राजा बलि का नाम प्रसिद्ध है। तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्र को इंद्रलोक कहते थे, जहां नंदन कानन वन और खंडववन था। राजा बलि ने अरब को अपना निवास स्थान बनाया था।

 

अगले पन्ने पर भारत चक्रवर्ती सम्राट...




और भी पढ़ें :