यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है, जहां से देश के प्रधानमंत्री देश के लोगों को संदेश देते हैं और स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं। लाल किले का निर्माण तोमर शासक राजा अनंगपाल ने 1060 में किया था। बाद में पृथ्वीराज चौहान ने इसका पुनर्निर्माण कराया और फिर मुगलों के शासन के दौरान इस किले को मुगल बादशाह शाहजहां ने तुर्क लुक दिया।
आगरा का किला मूलतः एक ईंटों का किला था, जो चौहान वंश के राजपूतों के पास था। इस किले का प्रथम विवरण 1080 ईस्वी में आता है, जब महमूद गजनवी की सेना ने इस पर कब्जा कर लिया था। पुरुषोत्तम नागेश ओक की किताब 'आगरे का लाल किला हिन्दू भवन है' में भी इसका जिक्र है।
इस किले में 7 दरवाजे हैं जिनके नाम हिन्दू देवताओं के नाम पर पड़े हैं। प्रथम प्रवेश द्वार पैदल पोल के नाम से जाना जाता है, जिसके बाद भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्मण पोल और अंत में राम पोल है, जो सन् 1459 में बनवाया गया था। किले की पूर्वी दिशा में स्थित प्रवेश द्वार को सूरज पोल कहा जाता है। इस किले में कई सुंदर मंदिरों के साथ-साथ रानी पद्मिनी और महाराणा कुम्भा के शानदार महल हैं। हालांकि इस किले के कई हिस्से अब खंडहर में बदल चुके हैं।
सुबह सूर्य की अरुण चमकीली किरणें जब इस दुर्ग पर पड़ती हैं तो बालू मिट्टी के रंग-परावर्तन से यह किला पीले रंग से दमक उठता है। सोने-सी आभा देने के कारण इसे 'सोनार किला' या 'गोल्डन फोर्ट' भी कहा जाता है। इस दुर्ग की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस दुर्ग के चारों ओर 99 गढ़ बने हुए हैं। इनमें से 92 गढ़ों का निर्माण 1633 से 1647 के बीच हुआ था।
पन्हाला किले को पन्हालगढ़, पाहाला और पनाल्ला के नाम से भी जाना जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है सांपों का घर। पन्हाला किला महाराष्ट्र के कोल्हापुर से उत्तर-पश्चिम दिशा में 20 किलोमीटर दूर स्थित है।
यह किला मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम युग का मूक गवाह और अरब सागर में मराठों के आधिपत्य का प्रत्यक्ष प्रमाण है। किले में शिवाजी को समर्पित एक मंदिर भी है जिसे राजाराम ने बनवाया था। किले की दीवारों पर राजा के हाथ और पैरों के निशान देखे जा सकते हैं।