फादर्स डे : पिता वटवृक्ष है, उनका दिवस जरूर मनाएं
गोविंद वैभव ने आर्चीज गैलरी से कुछ खास खरीददारी की है। गिफ्ट इस बार गर्लफ्रेंड के लिए नहीं बल्कि उस व्यक्ति के लिए है जिसके प्यार और दुलार की छांव में उसने अपना बचपन गुजारा और जिसने कदम-कदम पर उसे सही रास्ते पर चलने की सीख दी। फादर्स डे के मौके पर वह अपने पिता को ढेरों उपहार देकर इस दिन को यादगार बनाना चाहता है।
गोविंद कहते हैं, ‘वैसे तो ऐसा एक भी दिन नहीं होता जब मैं अपने पिता से मिलने वाले दुलार के लिए भगवान को धन्यवाद नहीं देता, लेकिन आज एक ऐसा दिन है जब मैं अपने पिता को धन्यवाद देता हूं जिनसे मेरा वजूद है।’ पिता को सम्मान देने के लिए शुरू किया गया फादर्स डे इस बार भी जोर-शोर से मनाया जा रहा है। फादर्स डे का इतिहास भी कुछ कम रोचक नहीं है।
डेली अमेरिका के अनुसार, अमेरिका के वाशिंगटन में रहने वाली सोनोरा स्मार्ट डोड ने 1909 में स्पोकेन के सेंट्रल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च में मदर्स डे के बारे में सुना तो उन्हें पिता के लिए भी ऐसा ही दिन होने की जरूरत महसूस हुई।सोनोरा के पिता विलियम स्मार्ट ने अपनी पत्नी के गुजरने के बाद पूरे परिवार की देखभाल की थी और सोनोरा इसके लिए उन्हें दिल से धन्यवाद देना चाहती थी, लिहाजा पहली बार 1910 में जून महीने के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया गया।फादर्स डे को आधिकारिक छुट्टी का दिन बनने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। चर्च और लोगों का समर्थन मिलने के बावजूद कैलेंडर से इस दिन के गायब हो जाने का खतरा पैदा हो गया था।