क्योंकि आप सब से अलग हो पापा....
अंकिता चौधरी
पापा के नाम, चिट्ठी बेटी की....
प्रिय पापा,
कैसे हैं आप? मैं आपको यह सब मिलकर भी बता सकती हूं, पर यह पत्र सिर्फ आपके लिए है। इस फादर्स-डे पर आपके प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करना चाहती हूं क्योंकि आप सब से अलग हो। आप मेरे हीरो हैं। मुझे लगता है कि हर लड़की के सबसे पहले हीरो उस के पापा होते हैं। अंगुली पकड़ कर आप ने ही तो चलना सिखाया मुझको,अपनी नींद देकर सुलाया मुझको।
जब मैं उदास होती हूं तब आप का मुझे देखकर मेरी नकल उतार कर मुझे चिढ़ाना और एकदम से उदासी भरे चेहरे पर मुस्कान लाना मेरे मन में ताउम्र ताजा रहेगा। मां से लड़ाई करते वक्त जब आप झूठ में मेरा साथ देते हो तो अच्छा लगता है। दुनियाभर की बातें आप ही से तो किया करती हूं। मुझे पता है आप हम सभी को कितना मिस करते हो। शुक्रवार आते ही जो खुशी होती है न पापा वो सब से अलग होती है। और सोमवार को जब आप वापस शाजापुर जाते हैं तो एक उदासी छा जाती है। आप जब मुझे गले लगाकर कहते हैं बस तीन दिन और फिर आ जाउंगा तेरे पास तो मुझे सुकून हो जाता है। आपकी तबीयत खराब होने पर जब मैं पूछती हूं कैसी तबियत है तो आप इतनी सफाई से झूठ बोल जाते हो ताकि हम परेशान न हो जाएं।
हल्का सा जुकाम होने पर दिन में चार बार आपका फोन आना और पूछना बेटा अब कैसी है तेरी तबियत। ये सब आपका प्यार ही तो है। आप रहते वहां हो पर पूरे समय आपको हमारी चिंता होती है। आप हमेशा साथ रहना पापा क्योंकि आप ही तो हो जो आज भी मुझे सही गलत में फर्क सिखाते हैं, मेरा ध्यान रखते हैं। आप साथ हैं तो सब मुश्किल आसान लगती है। जब आप कहते हो बेटा तुम कोशिश करो मैं तुम्हारे साथ हूं एक अलग ही उत्साह बढ़ाता है।
मैं आपकी बेटी नहीं बेटा बनकर आपके साथ रहना चाहती हूं। आपका सिर कभी शर्म से झुकाना नहीं गर्व से उठाना चाहती हूं। अब आपको आराम देना चाहती हुं। आपने हमारे लिए बहुत कुछ किया है, अब मैं कुछ आप के लिए करना चाहती हूं पापा। एक बार फिर से बचपन में जाना चाहती हूं। एक बार फिर से रंगबिरंगी फ्रॉक पहनकर बाजार जाना है, एक बार फिर आपकी अंगुली पकड़ कर चलना चाहती हूं। ऐसा क्यों होता है पापा आपके साथ इतना समय रहने के बाद भी एक दिन आपको छोड़कर जाना पड़ेगा। क्या मैं हमेशा आपके पास आपके साथ नहीं रह सकती पापा?