Laddumar Holi 2026 : बरसाना में उमड़ा जनसैलाब, लड्डू मार होली के रंग में रंगे श्रद्धालु
ब्रजभूमि में होली की खुमारी चरम पर पहुंचने लगी है, आज लाडली जी मंदिर में भक्ति, उल्लास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब विश्व प्रसिद्ध लड्डूमार होली पूरे हर्षोल्लास के साथ खेली गई। रंगों और अबीर-गुलाल के साथ-साथ कई कुंतल लड्डुओं की वर्षा ने इस अनोखी होली को और भी खास बना दिया। दूर-दराज से आयें श्रद्धालु लड्डुओं की इस बरसात में सराबोर होकर खुद को धन्य मानते नजर आए।
ब्रज का होली महोत्सव सवा महीने तक चलता है, इन होलियों में बरसाना की लड्डूमार होली की अपना विशिष्ट पहचान है। बरसाना की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और परंपरा का जीवंत उत्सव है, जहां हर चेहरा खिलखिलाते और हर दिल “राधे राधे” के रंग में रंग सराबोर दिखाई देता है। इस मौके पर लडडू मार होली के लिए हजारों किलो लडडू तैयार करने के लिए कारीगरों की बड़ी टीम लगाई जाती है।
राधा रानी की नगरी बरसाना के प्राचीन मंदिर में द्वापर युग से चली आ रही परंपरा का निर्वहन प्रत्येक वर्ष देखने को मिलता है, यहां नंदगांव से आए गोप, जिन्हें भगवान कृष्ण के सखा माना जाता है, राधा रानी के महल में होली का निमंत्रण देने पहुंचते हैं। राधा की सखियां कृष्ण के गोपों का लड्डू मारकर स्वागत करती है, जिसके चलते ब्रज में लड्डू मार होली का प्रथा आज भी जीवंत है और श्रृद्धालु लड्डू मार होली को कृष्ण का प्रसाद मानते हुए खुद को धन्य मानते है।
आज सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश ही नहीं, विदेशों से भी लाखों की संख्या में भक्त इस अनूठे उत्सव का साक्षी बनने बरसाना पहुंचे। जैसे ही लड्डुओं की वर्षा शुरू हुई, पूरा परिसर “राधे-राधे” और “श्याम” के जयकारों से गूंज उठा। रंग, भक्ति और मिठास का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है।
मान्यता है कि इस दिव्य उत्सव को देखने स्वयं देवता भी देवलोक से धरती पय किसी न किसी रूप में उतर आते हैं। राधा-कृष्ण की इस अलौकिक लीला से जुड़ी लड्डूमार होली केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है, जो युगों से ब्रज की पहचान बना हुआ है। Edited by : Sudhir Sharma