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दद्दा जी ने अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा की : शिवराज सिंह

Devprabhakar Shastri
भोपाल। दद्दा जी के नाम से देश में विख्यात गृहस्थ संत देव प्रभाकर शास्त्री का रविवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से पूरा प्रदेश द्रवित है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि श्रद्धेय दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का एक ऐसा अभियान चलाया जिससे अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा हुई और भारतीय संस्कृति को एक ही धागे में पिरोने का पवित्र कार्य हुआ।
 
शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश के महान संत, आध्यात्मिक गुरु, लाखों लोगों के जीवन को दिशा देने वाले, ऐसे महात्मा जिनका सम्पूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित था, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति व आशीर्वाद से लोगों की ज़िंदगी बदल दी। ऐसे पूजनीय दद्दाजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि दद्दा जी का देवलोकगमन आज हुआ है। उनका आशीर्वाद मुझे सदैव मिला और वे आज भी मुझे आशीर्वाद और प्रेरणा देते दिखाई दे रहे हैं। वे भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों लेकिन वे सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे, आशीर्वाद देते रहेंगे और हमें सन्मार्ग दिखाते रहेंगे। उनके चरणों में प्रणाम।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने ट्‍विटर पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा 'आज परम पूज्य गुरुदेव पं. देवप्रभाकर जी शास्त्री दद्दा जी नश्वर देह त्यागकर परमपिता परमेश्वर में विलीन हो गए। वो हमारे ह्दय में हमेशा रहेंगे एवं उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहेगा। परम पूज्य गुरुदेव जी के चरणों में कोटिश: नमन।
 
सनातन संस्कृति के इतिहास में दद्दा जी जैसे संत दुर्लभ : पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। भार्गव ने कहा कि आज परम पूज्य गृहस्थ संत देव प्रभाकर जी शास्त्री जिन्हें हम सभी 'दद्दा जी' के नाम से, प्रेम भाव से स्मरण करते थे, हमारे बीच नही रहें। अपने जीवन के 60 वर्ष उन्होंने गृहस्थ सन्त के रूप में बिताए, जो कि सनातन संस्कृति के इतिहास में दुर्लभ है। 
 
पूज्य शास्त्री जी परम ज्ञानी, तपस्वी एवं सिद्ध पुरुष थे। उनका निधन सनातन धर्म अनुयायियों के पितृ पुरूष का प्रयाण है। वह साक्षात भगवत पुत्र थे। भार्गव ने कहा कि दद्दा जी वैसे तो वह परम शिव भक्त और कृष्ण भक्त होने के नाते स्वर्ग प्राप्ति के प्रथम अधिकारी हैं। भगवन चरणों में उनका स्थान चिर आरक्षित था। उनके सभी अनुयायियों को प्रभु यह गहन दु:ख सहने की शक्ति दे। ॐ शांति शान्ति..
दिग्विजय सिंह ने दी श्रद्धांजलि :  दिग्विजय सिंह ने कहा कि श्रद्धेय दद्दा जी के दु:खद निधन का समाचार सुनकर बेहद दु:ख हुआ। मैं उनके लाखों शिष्यों में से एक था। नर्मदा परिक्रमा के समय हमें उनका खूब आशीर्वाद रहा और परिक्रमा पूर्ण होने के भंडारे की संपूर्ण व्यवस्था दद्दा जी शिष्य मंडल द्वारा ही की गई थी।

आदरणीय दद्दा जी मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक क्षेत्र के प्रमख गुरूजनों मे से एक थे। उनके निधन से हम सभी शिष्यों को अपूर्णीय क्षति पहुंची है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। हमारी आत्मीय श्रद्धांजलि!
लेखक के बारे में
विकास सिंह
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