पौष अमावस्या में पितृ तर्पण और सूर्य आराधना की पूजा सामग्री और पूजा विधि
Paush amavasya 2025: वर्ष 2025 में पौष अमावस्या 19 दिसंबर (शुक्रवार) और 20 दिसंबर (शनिवार) के संगम पर मनाई जाएगी। विद्वानों और पंचांग के अनुसार, पौष अमावस्या पर पूजा की विधि और मुहूर्त का पालन करना अत्यंत फलदायी होता है। यहाँ आपकी सुविधा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री की विस्तृत जानकारी दी गई है।
1. पूजा की आवश्यक सामग्री:
पितृ तर्पण और सूर्य पूजन के लिए आपको इन वस्तुओं की आवश्यकता होगी:
सूर्य पूजन के लिए:
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तांबे का लोटा (पात्र)
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अक्षत (साबुत चावल)
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लाल चंदन या कुमकुम
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लाल रंग के ताजे फूल (जैसे गुड़हल या गुलाब)
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शुद्ध जल
2. पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए:
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काले तिल (पितरों को अत्यंत प्रिय)
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जौ और सफेद फूल
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कुश (एक प्रकार की घास, जिसका उपयोग हाथ की अनामिका उंगली में पहनकर तर्पण के लिए होता है)
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कच्चा दूध और गंगाजल
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धूप, अगरबत्ती और शुद्ध घी का दीपक
3. दान के लिए:
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सफेद वस्त्र या गर्म कपड़े (कंबल आदि)
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अन्न (चावल, दाल, आटा)
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सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा (सिक्के या नोट)
4. सरल पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर किसी नदी या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
सूर्य अर्घ्य: तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल चंदन, फूल और अक्षत डालें। 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें।
तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में कुश धारण करें और जल में काले तिल मिलाकर अपने पितरों का ध्यान करते हुए तीन बार जलांजलि दें।
दीप दान: घर के ईशान कोण में या मंदिर में घी का दीपक जलाएं। पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाना शुभ होता है।
पंचबलि भोग: संभव हो तो भोजन बनाकर उसका छोटा हिस्सा गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए निकालें।
दान: अंत में किसी ब्राह्मण या निर्धन व्यक्ति को आदरपूर्वक दान दें।
विशेष टिप: यदि आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इस दिन "ॐ पितृभ्यः नमः" मंत्र का 108 बार जाप करना विशेष शांति प्रदान करता है।
photo courtesy: WD/AI