क्या तुम्हें एहसास है अनगिनत उन आंसुओं का? क्या तुम्हें एहसास है सड़ते हुए नरकंकालों का? क्या तुम्हें आती नहीं आवाज, रोते नन्हे मासूमों की? क्या नहीं जलता हृदय देख पीड़ितों को? अफ्रीका-एशिया के शोषित, बीमार, बेघर, शोषित कोटि मनुज, अनाथ बालकों की सूनी लाचार आंखें देख-देखकर।...