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दुर्गा सप्तशती के हर अध्याय से होती है विशेष कामनापूर्ति

जानिए दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय से कौन सी कामना होती है पूरी
 
दुर्गा सप्तशती के अलग-अलग अध्यायों का अपना-अपना महत्व है जिनका यदि भक्तिभाव से पाठ किया जाए तो फल बड़ी जल्दी मिलता है, लेकिन लालच से किया पाठ फल नहीं देता।

यदि किसी भी जातक को राहू, शनि, मंगल से बुरे फल मिल रहे हों तो ये अध्याय पूरी क्षमता रखते हैं उनके बुरे दोषों को दूर करने में। हर अध्याय का अपना एक महत्व है-
 
1. प्रथम अध्याय : हर प्रकार की चिंता मिटाने के लिए। मानसिक विकारों की वजह से आ रही अड़चनों को दूर करता है, मन को सही दिशा की ओर ले जाता है तथा जो चेतना खो गई है उसको एकत्र करता है।
 
2. द्वितीय अध्याय : मुकदमे, झगड़े आदि में विजय पाने के लिए यह पाठ काम करता है। लेकिन झूठा और आपने गलत किसी पर किया हो तो फल नहीं मिलता बल्कि आप खुद बुरा परिणाम भोगेंगे।
 
3. तृतीय अध्याय : शत्रु से छुटकारा पाने के लिए। शत्रु यदि बिना कारण बन रहे हैं और नुकसान का पता न चल रहा हो कि कौन कर रहा है तो यह पाठ उपयुक्त हैं।
 
 

 





4. चतुर्थ अध्याय : भक्ति, शक्ति तथा दर्शन के लिए। जो साधना से जुड़े होते व समाज हित में साधना को चेतना देना चाहते हैं तो यह पाठ फल देता है।
 
5. पंचम अध्याय : भक्ति, शक्ति तथा दर्शन के लिए। हर तरह से परेशान हो चुके लोग जो यह सोचते हैं कि हर मंदिर-दरगाह जाकर भी कुछ नहीं मिला, वे यह पाठ नियमित करें।
 
6. षष्ठम अध्याय : डर, शक, बाधा हटाने के लिए। राहु का अधिक खराब होना, केतु का पीड़ित होना, तंत्र, जादू, भूत इस तरह के डर पैदा करता है तो आप इस अध्याय का पाठ करें।
 
7. सप्तम अध्याय : हर कामना पूर्ण करने के लिए। सच्चे दिल से जो कामना आप करते हैं जिसमें किसी का अहित न हो तो यह अध्याय कारगर है।
 
 

 


8. अष्टम अध्याय : मिलाप व वशीकरण के लिए। वशीकरण गलत तरीके नहीं अपितु भलाई के लिए हो और कोई बिछड़ गया है तो यह असरकारी है।
 
9. नवम अध्याय : गुमशुदा की तलाश, हर प्रकार की कामना एवं पुत्र आदि के लिए। बहुत से लोग जो घर छोड़ जाते हैं या खो जाते हैं, यह पाठ उसके लौटने का साधन बनता है।
 
10. दशम अध्याय : गुमशुदा की तलाश, हर प्रकार की कामना एवं पुत्र आदि के लिए। अच्छे पुत्र की कामना रखने वाले या बच्चे गलत रास्ते पर चल रहे हों तो यह पाठ पूर्ण फलदायी है।
 
11. एकादश अध्याय : व्यापार व सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए। कारोबार में हानि हो रही है, पैसा नहीं रुकता या बेकार के कामों में नष्ट हो जाता है तो यह करें।
 
12. द्वादश अध्याय : मान-सम्मान तथा लाभ प्राप्ति के लिए। इज्जत जिंदगी का एक हिस्सा है। यदि इस पर कोई आरोप-प्रत्यारोप करता हो तो यह पाठ करें।
 
13. त्रयोदश अध्याय : भक्ति प्राप्ति के लिए। साधना के बाद पूर्ण भक्ति के लिए यह पाठ करें।