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Last Updated : गुरुवार, 25 सितम्बर 2025 (13:55 IST)

लेह-लद्दाख में हिंसा भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती, क्यों बैकफुट पर आए सोनम वांगचुक?

Leh-Ladakh violence
लेह में बुधवार को हुई हिंसा के बाद अब भी हालात तनवापूर्ण है। लेह में हिंसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है जो आज भी जारी है। वहीं आज कारगिल बंद का भी आव्हान किया  गया  है। हिंसा में 4 की मौत और 80 से अधिक  के घायल होने के  बाद गृह मंत्रालय ने हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि कार्यकर्ता ने अपने भड़काऊ बयानों के ज़रिए भीड़ को उकसाया। लद्दाख के एलजी  कवींद्र गुप्ता ने  कहा कि अपने फायदे के लिए  लोगों को भड़काया गया और  अब इस पूरे मामले की  जांच की जाएगी।
लेह-लद्दाख में क्यों भड़की हिंसा?-गौरतलब है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य के दर्जे दिए जाने को लेकर और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने को लेकर सोनम वांगचुक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। सोनम वांगचुक का कहना है कि भूख हड़ताल के  14 वे दिन जब भूख हड़ताल पर बैठे दो  अनशनकारियों की हालत बिगड़ गई तो लद्दाख बंद का आव्हान किया गया  था और बुधवार को  अचानक से 2 से पांच  हजार युवा सड़क पर निकल आए और हिंसा क। वहीं हिंसक प्रदर्शन के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को खत्म कर दिया। वेबदुनिया से  बातचीत में सोनम वांगचुक ने हिंसक प्रदर्शन की  निंदा करते हुए अपने को इससे अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि हिंसक प्रदर्शन से उनके पिछली पांच साल से चल रही लड़ाई अब विफल होती दिख रही है। 
ladakh violence

क्यों भड़के GEN-Z?- सोनम वांगचुक हिंसा को लद्दाख के बेरोजगार युवाओं की भड़ास बताते हुए कहते हुए लद्दाख के युवाओं को पिछले पांच साल से रोजगार नहीं मिल रहा था। युवाओं के बेरोजगार होने के चलते घर में उनके मां-बाप कोसते थे। उनके आगे अंधेरा और पीछे खाई थी। वह कहते है कि उनके साथ लद्दाख के लोग 10 सितंबर से अनशन कर रहे थे लेकिन सरकार की ओर जब 6 अक्टबूर को बातचीत की तारीख तय की गई तो उससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और हिंसा की घटना हुई।

वह कहते है कि बुधवार को हिंसा के दौरान जो GEN-Z सड़कों पर दिखाई दिए उनको पहले कभी नहीं देखा गया। लद्दाख के लोगों की  शिकायत रहती  थी कि युवा पीढ़ी कभी आगे नहीं आते थे ऐसे में अचानक से कैसे 2 से पांच हजार युवा सड़क पर आ गए यह सोचनीय है। वह कहते है कि उन्होंन लद्दाख के लोगों की मांग को  लेकर दिल्ली  तक पदयात्रा लेकिन उनकी सुनी नहीं अगर सरकार उनकी बात सुन लेती यह ऐसी घटना नहीं होती।

हिंसा पर राजनीति-सोनम वांगचुक कहते है कि उनका आंदोलन न कभी पॉलिटिक्ल था और पॉलिटिक्ल लोगों को कभी उनके मंच पर स्थान  दिया गया। वहीं सोनम वांगचुक कहते है कि अगर हिंसा की घटना के बाद भी सरकार लद्दाख के लोगों की बात को नहीं सुनती है तो आगे फिर हिंसा भड़क सकती है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शीर्ष निकाय, लेह (एबीएल) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उच्चस्तरीय समिति की बैठक के लिए 6 अक्टूबर की तारीख पहले ही तय कर दी थी, और एबीएल द्वारा प्रस्तावित उच्चस्तरीय समिति के लिए नए सदस्यों पर भी सहमति बन गई थी। 

लेह-लद्दाख में हिंसा क्यों चुनौती?-देश का सबसे शांत इलाका कहे जाने वाले लद्दाख में अचानक हिंसा भड़क देश की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। लद्दाख न सिर्फ धार्मिक विविधता का प्रतीक है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति इसे भारत की सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक बनाती है।चीन और पाकिस्तान के नजदीक होने के कारण यहां का हर इंच भारत की सुरक्षा से जुड़ा है. यही वजह है कि साल 2019 में केंद्र सरकार ने इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया, ताकि विकास योजनाओं और संसाधनों पर सीधा फोकस किया जा सके।

लद्धाख के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख को पूर्ण रा्ज्य दिलाने की मांग तेज हो गई थी और बीते पांच साल से इसके लिए आंदोलन हो रहा था।चीन और पाकिस्तान  की सीमा से लगे ऊंचाई पर बसे इस इलाके में सेना की तैनाती से लेकर सड़क, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी तक सब कुछ रणनीतिक मायने रखता है। यही कारण है कि लद्दाख के कोने-कोने पर भारत की पैनी नजर रहती है। साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन  के बीच सैन्य झ़ड़प में भारतीय जवानों के  शहीद होने से लद्दाख की सुरक्षा को लेकर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए थे।

 
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