Southward Goddess Mother Chandi Bear Devi Darshan। छत्तीसगढ़ में भालू की मौत, रोज देवी के दर्शन करने आता था
रायपुर। किसी समय तंत्र साधना के लिए मशहूर चंडी देवी मंदिर का गलियारा सोमवार को सूना-सूना नजर आया। महासमुंद जिले के बागबहरा से करीब 5 किलोमीटर दूर जंगल के बीच स्थित इस मंदिर में रोजाना दर्शन करने आने वाले भालू की मौत से पूरा वातावरण गमजदा है।
सबसे खास बात यह है कि आरती के समय नियमित रूप से आने वाले इस भालू ने आज तक कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वह रोज आता था और प्रसाद खाने के बाद पुन: जंगल लौट जाया करता था। न तो यह भालू हिंसक हुआ और न ही भालुओं का दूसरा कुनबा, जो नवरात्र में यहां आया करता था।
पूरे इलाके में बहुचर्चित इस मंदिर में दक्षिणमुखी देवी मां चंडी की प्राकृतिक रूप से बनी 23 फीट ऊंची प्रतिमा है। नवरात्र के दिनों में यहां पर श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। इस मेले में कई भालू आते हैं जिनमें मृतक भालू भी शामिल था। भालुओं का यह झुंड कभी हिंसक नहीं हुआ। आसपास के रहने वाले लोग मानते हैं कि यह जामवंत का परिवार है, जो देवी के दर्शन बिना नहीं रह सकता।
मंदिर में काफी भीड़ रहती है। शाम ढलने के बाद आरती के वक्त कई भालू यहां आते हैं और मंदिर की परिक्रमा करके प्रसाद पाकर वापस जंगल में लौट जाया करते हैं। इन्हीं भालुओं में से एक रोजाना मंदिर में दर्शन करने आने वाले एक भालू की मौत ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है।
यहां के पुजारी का भी कहना है कि मंदिर आने वाले भालू कभी हिंसक नहीं हुए और न ही किसी भक्त को नुकसान पहुंचाया। यहां पर भक्त भी इन भालुओं को खाने-पीने की चीजें देते हैं। यही नहीं, कई लोग तो उनके साथ यादगार के लिए तस्वीरें भी खिंचवाते हैं।
उल्लेखनीय है कि चंडी देवी मंदिर एक जमाने में तंत्र साधना के लिए काफी प्रसिद्ध रहा है। यहां पर साधुओं का अकसर डेरा जमा हुआ करता था। चूंकि यह स्थान काफी एकांत में है लिहाजा तंत्र साधना में कोई बाधा भी नहीं आती थी लेकिन 1950-51 के बाद इस मंदिर के दरवाजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे।
