गुरुवार, 15 जनवरी 2026
  1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. SIR has increased BJPs difficulties in Ayodhya
Last Modified: शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 (18:18 IST)

SIR ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किल, अयोध्या में 15000 से ज्यादा संत-महंतों की विकट समस्या

अयोध्या के मेयर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने मुख्य निर्वा‍चन अधिकारी से की बात

SIR In Ayodhya
SIR In Ayodhya: रामनगरी अयोध्या धाम में लगभग 15 हजार से अधिक साधु-संतों ने भाजपा की नींद उड़ा दी है। इन साधु-संतों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म में माता के कॉलम में सीता, दुर्गा, जानकी, कौशल्या इत्यादि नामों का उल्लेख किया है, जबकि पिता के कॉलम में अपने गुरु या देवताओं का नाम भरा है, जो कि एसआईआर के नियमों के अनुकूल नहीं है। दरअसल, ये सभी संत-महंत भाजपा के ही वोटर हैं। ऐसे में भाजपा के लिए चिंता होना स्वाभाविक है।
 
इस परंपरा की शुरुआत भाजपा के पूर्व सांसद व राम मंदिर आंदोलन के नायक एवं हिन्दू धाम के पीठाधीश्वर साकेतवासी डॉ. रामविलास दास वेदांती ने अपने SIR फॉर्म मे माता-पिता के कॉलम मे देवी-देवताओं के नामों का उल्लेख किया था। इसके बाद डॉ. वेदांती का अनुसरण करते हुए अयोध्या के दिगंबर अखाडा, हनुमानगढ़ी सहित अधिकांश साधु-संतों ने भी अपने SIR फॉर्म में माता-पिता वाले कॉलम में ऐसे ही देवी-देवताओं का नाम भरा, जिसके बाद आयोग के अधिकारियों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। अब सवाल यह भी उठता है कि क्या ऐसे फॉर्म निरस्त किए जाएंगे या फिर कोई अन्य व्यवस्था की जाएगी। 
 
क्या कहते हैं अयोध्या के साधु-संत : SIR फॉर्म को लेकर वेबदुनिया ने अयोध्या के संत-महंतों से बात की। अयोध्या के बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास ने बताया कि हिन्दू लॉ का एक कॉलम है, जिसमें स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि महात्माओं के यहां संतान उत्पत्ति का प्रावधान न होने की वजह से उनके शिष्य गोद लिए संतान का अधिकार प्राप्त करेंगे।  उन्होंने कहा कि जब हम लोग अपना घर-परिवार छोड़ते हैं तो हमारा गोत्र, कुल व खानदान सब समाप्त हो जाता है। गृह त्यागने के बाद परिवार व जाति से भी कोई संबंध नहीं रहता। सब कुछ छोड़कर जब सनातन के लिए समर्पित हो गए तो हमारे माता-पिता सिर्फ भगवान ही होते हैं। 
 
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पूरे देश में साधु-संतों, महात्माओं की भी बहुत बड़ी संख्या और हिन्दू लॉ के अनुसार ही फॉर्म में उल्लेख करना चाहिए, क्योंकि संत अगर माता-पिता के नाम के आगे अपने देवी- देवताओं का नाम लिखता है या गुरु का नाम लिखता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। जगतगुरु राम दिनेशाचार्य ने कहा कि जब संत बनते हैं तो गोत्र बदल जाता है। इसके बाद उनका अच्युत गोत्र हो जाता है। इसके बाद साधु-संतों के माता-पिता श्रीसीताराम ही होते हैं।
 
निर्वाणी अनि अखाड़ा के महंत सीताराम दास ने जिन्होंने अपने SIR फार्म में माता के स्थान पर जानकी व पिता के नाम के सामने गुरु लिखा है। उन्होंने बताया कि घर-परिवार त्यागने के बाद हमारा अपना कोई नहीं है। संन्यास जीवन विरक्त का होता है जिसका मतलब ही यही है कि रक्त संबंधों से संबंध तोड़ लेना। इसके बाद हमारे लिए ईश्वर व गुरु ही सब कुछ हैं। 
साधु-संतों के लिए अलग से व्यवस्था हो : अयोध्या के तपस्वी छावनी के महंत ब्रम्ह ऋषि दशरथ दास ने बताया कि इस फॉर्म में तो साधु-संतों के लिए के लिए भी अलग से कॉलम की व्यवस्था होनी चाहिए थी। इसे चुनाव आयोग को ध्यान मे रखना चाहिए कि साधु-संत अपने परिवारों से विरक्त हो चुके हैं। माता जानकी ही उनकी मां हैं और पिता के स्थान पर संरक्षक और गुरू हैं, जिसे पिता के स्थान पर लिखा जाता है।
 
इसी प्रकार से अयोध्या के सैकड़ो मंदिरों में रह रहे साधु-संतों ने बताया कि जब हमने अपना घर-परिवार सब त्याग दिया तो हमारे माता-माता भगवान और गुरु ही हैं। अयोध्या विकास प्राधिकरण के अनुसार नगर के 60 वार्डों के अंतर्गत 24.7 लाख मतदाता निवास करते हैं, जिनमें 12.6 लाख पुरुष व 12.1 लाख महिलाए हैं जबकि 15 हजार से अधिक साधु-संत हैं, जो कि अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों व अखाड़ों में रहते हैं।  
 
क्या कहते हैं अयोध्या के मेयर : अयोध्या नगर निगम के मेयर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है। हमने इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से बात भी की है। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसे मामलों के लिए नए निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। 
 
भाजपा के लिए भी चिंता का विषय : 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी सभी राजनीतिक दलों ने बड़ी तेजी से शुरू कर दी है। शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन मजबूत की जा रही है। केवल राम नगरी अयोध्या में ही साधु-संतों की संख्या 15 हजार से अधिक है। यदि काशी, मथुरा, प्रयागराज को भी जोड़ लें तो ऐसे संत मतदाताओं की संख्या 1 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। ऐसे में यह भाजपा के लिए टेंशन का कारण हो सकता है क्योंकि ये सभी वोटर भाजपा के ही हैं। उल्लेखनीय है कि यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मतदाता सूची में 4 करोड़ लोग शामिल नहीं हो पाए हैं। इनमें 85 से 90 फीसदी लोग भाजपा के ही वोटर हैं। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
ये भी पढ़ें
यूनुस राज में बांग्लादेश में हुईं 2900 से ज्यादा घटनाएं, हिंदुओं के कत्लेआम पर क्‍या बोला विदेश मंत्रालय?