1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. राष्ट्रीय
  4. Parliament session will start from 22nd July

22 जुलाई से शुरू होगा संसद का सत्र, सांसदों को याद दिलाए शिष्टाचार के नियम

कहा कि संसद में 'वन्दे मातरम्' सहित अन्य नारे नहीं लगाए जाएं

Parliament session will start from 22nd July
नई दिल्ली। संसद सत्र (Parliament session) सोमवार से शुरू होने से पहले सांसदों को याद दिलाया गया है कि सभापति के निर्णयों की सदन के अंदर या बाहर सीधे तौर पर या परोक्ष रूप से आलोचना नहीं की जानी चाहिए और सदस्यों को 'वन्दे मातरम्' (Vande Mataram) व 'जय हिन्द' (Jai Hind) सहित अन्य नारे नहीं लगाने चाहिए।
 
सदस्यों को यह भी याद दिलाया गया है कि सदन में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करने की भी नियम अनुमति नहीं देते। राज्यसभा सचिवालय ने 'राज्यसभा सदस्यों के लिए पुस्तिका' के कुछ अंश को 15 जुलाई को अपने बुलेटिन में प्रकाशित कर संसदीय परंपराओं और संसदीय शिष्टाचार के प्रति सदस्यों का ध्यान आकृष्ट किया है।

 
संसद सत्र 22 जुलाई से शुरू होगा : संसद सत्र 22 जुलाई से शुरू हो रहा है और यह 12 अगस्त को संपन्न होगा। बुलेटिन में कहा गया है कि सदन की कार्यवाही की गरिमा और गंभीरता के लिए यह आवश्यक है कि सदन में 'धन्यवाद', 'आपका शुक्रिया', 'जय हिन्द', 'वन्दे मातरम्' या अन्य कोई नारा नहीं लगाया जाना चाहिए।
 
इसमें कहा गया है कि सभापति द्वारा सदन के पूर्व के दृष्टांतों के अनुसार निर्णय दिए जाते हैं और जहां कोई उदाहरण नहीं है, वहां सामान्य संसदीय परंपरा का पालन किया जाता है। बुलेटिन में पुस्तिका के अंश को उद्धृत करते हुए कहा गया है कि सभापति द्वारा दिए गए निर्णयों की सदन के अंदर या बाहर सीधे तौर पर या परोक्ष रूप से आलोचना नहीं की जानी चाहिए।

 
संसदीय शिष्टाचार का पालन करने का अनुरोध : संसदीय शिष्टाचार का हवाला देते हुए बुलेटिन में कहा गया कि आक्षेप, आपत्तिजनक और असंसदीय अभिव्यक्ति वाले शब्दों का इस्तेमाल करने से पूरी तरह से बचना चाहिए। पुस्तिका में कहा गया है कि जब सभापति को लगता है कि कोई विशेष शब्द या अभिव्यक्ति असंसदीय है तो उसे बिना बहस के तुरंत वापस लेना चाहिए।

 
पीठासीन अधिकारी का झुककर अभिवादन करें : इसमें यह भी कहा गया है कि प्रत्येक सदस्य को सदन में प्रवेश करने या बाहर निकलते समय और सीट पर बैठने या उठकर जाने से पहले पीठासीन अधिकारी का झुककर अभिवादन करना चाहिए। कोई सदस्य जब किसी अन्य सदस्य या मंत्री की आलोचना करता है तो अपेक्षा की जाती है कि आलोचना करने वाला सदस्य उत्तर सुनने के लिए सदन में उपस्थित रहे। पुस्तिका में कहा गया है कि जब सदन में मंत्री उत्तर दे रहे हों तो सदन में अनुपस्थित रहना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन है।(भाषा)
 
Edited by: Ravindra Gupta
लेखक के बारे में
वेबदुनिया न्यूज डेस्क
वेबदुनिया न्यूज़ डेस्क पर हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, साक्षात्कार तथा रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच-परख कर प्रकाशित किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
Microsoft Outages : 15 घंटे तक ठप रहा माइक्रोसॉफ्ट का सर्वर, हुआ 73000 करोड़ का नुकसान