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Last Modified: कोलकाता , गुरुवार, 8 जनवरी 2026 (13:00 IST)

नोबेल विजेता अमर्त्य सेन को SIR में नोटिस, चुनाव आयोग ने दी सफाई, TMC ने लगाया BJP पर मिलीभगत का आरोप

Nobel laureate Amartya Sen receives notice from SIR
Notice to Amartya Sen in SIR : पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को सुनवाई का नोटिस जारी होने से राजनीतिक बवाल मच गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिस फॉर्म में तकनीकी विसंगति के कारण जारी हुआ था, जिसमें सेन और उनकी मां की उम्र में 15 साल से कम का अंतर दिख रहा था। आयोग के अनुसार, सभी मतदाताओं के साथ समान व्यवहार किया जाता है और किसी VIP को विशेष छूट नहीं मिलती।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अमर्त्य सेन के फॉर्म में यह त्रुटि सामने आई क्योंकि परिवार के सदस्य ने उन्हें अपनी मां अमिता सेन से लिंक किया था, लेकिन सिस्टम में उम्र का अंतर असामान्य लगने से ऑटोमैटिक नोटिस जेनरेट हो गया।

चूंकि सेन की उम्र 92 वर्ष से अधिक है, इसलिए उन्हें सुनवाई केंद्र पर आने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) उनके शांतिनिकेतन स्थित पैतृक आवास 'प्रतीची' पर जाकर दस्तावेजों की जांच करेंगे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारी पहले ही घर पर जाकर औपचारिकताएं पूरी कर चुके हैं।
इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस ने तीव्र विरोध जताया है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रामपुरहाट में एक रैली में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से बंगाल की प्रमुख हस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, अमर्त्य सेन जैसे व्यक्ति, जिन्होंने नोबेल जीतकर देश का नाम रोशन किया, उन्हें नोटिस भेजना बंगाल का अपमान है। यह बंगला-विरोधी एजेंडा है। अभिषेक ने दावा किया कि अभिनेता एवं सांसद देव और क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी ऐसे नोटिस भेजे गए हैं। अमर्त्य सेन के परिवार ने इसे 'उत्पीड़न' करार दिया है।
 
विपक्षी भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे महज तकनीकी गलती या वर्तनी की त्रुटि बताया और कहा कि चुनाव आयोग बिना कारण नोटिस नहीं भेजता। उन्होंने सेन से सहयोग करने की अपील की।
चुनाव आयोग ने जोर देकर कहा कि एसआईआर प्रक्रिया निष्पक्ष है और लाखों मतदाताओं में ऐसी विसंगतियां सामने आई हैं, जिन्हें नियम अनुसार सुलझाया जा रहा है। यह मामला बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है।
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