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हिंदू डॉक्टर ने लिखा, यहां मुसलमानों के इलाज नहीं किया जाता, इसके बाद क्या हुआ?
जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले के साइड इफैक्ट्स अब कई जगह नजर आने लगे। मध्यप्रदेश के इंदौर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां एक डॉक्टर ने मरीज को इसलिए इलाज से मना कर दिया क्योंकि मरीज मुसलमान है। दरअसल, यह डॉक्टर इंदौर की हैं। इनका नाम डॉ नेहा अरोरा है। यह खबर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है।
क्या है पूरा मामला : जो जानकारी सामने आ रही है, उसमें पता चला है कि डॉ नेहा वर्मा से महाराष्ट्र की एक मुस्लिम मरीज ने पूछा था कि क्या वे मेरे घुटने का इलाज कर सकती है। इस पर डॉ नेहा ने उनसे मरीज का नाम पूछा तो मरीज ने अपना नाम फराह हुसैन बताया। यह नाम सुनने के बाद डॉ नेहा अरोरा कहा कि अब नए बदलाव के मुताबिक उनके यहां मुस्लिम मरीजों का इलाज नहीं किया जाता है। बता दें कि यह सारी बातचीत उन्होंने अपने व्हाट्सएप पर की है। जिसके बाद उसका स्क्रीन शॉट उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट में शेयर किया था।
बाद में स्क्रीन शॉट डिलीट किया : हालांकि बाद में डॉक्टर नेहा अपना यह स्क्रीन शॉट हटा लिया। उसे सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया। लेकिन इसके बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आतंवादियों ने हमला किया है ऐसे में डॉक्टरों द्वारा धर्म देखकर इलाज से मना करना कितना सही है। लोग पूछ रहे हैं कि आतंकवादियों ने धर्म पूछकर गोली मारी और आप धर्म पूछकर इलाज कर रही हैं तो आप में और आतंकियों की सोच में क्या फर्क है।
Edited By: Navin Rangiyal
क्या है पूरा मामला : जो जानकारी सामने आ रही है, उसमें पता चला है कि डॉ नेहा वर्मा से महाराष्ट्र की एक मुस्लिम मरीज ने पूछा था कि क्या वे मेरे घुटने का इलाज कर सकती है। इस पर डॉ नेहा ने उनसे मरीज का नाम पूछा तो मरीज ने अपना नाम फराह हुसैन बताया। यह नाम सुनने के बाद डॉ नेहा अरोरा कहा कि अब नए बदलाव के मुताबिक उनके यहां मुस्लिम मरीजों का इलाज नहीं किया जाता है। बता दें कि यह सारी बातचीत उन्होंने अपने व्हाट्सएप पर की है। जिसके बाद उसका स्क्रीन शॉट उन्होंने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट में शेयर किया था।
बाद में स्क्रीन शॉट डिलीट किया : हालांकि बाद में डॉक्टर नेहा अपना यह स्क्रीन शॉट हटा लिया। उसे सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया। लेकिन इसके बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आतंवादियों ने हमला किया है ऐसे में डॉक्टरों द्वारा धर्म देखकर इलाज से मना करना कितना सही है। लोग पूछ रहे हैं कि आतंकवादियों ने धर्म पूछकर गोली मारी और आप धर्म पूछकर इलाज कर रही हैं तो आप में और आतंकियों की सोच में क्या फर्क है।
Edited By: Navin Rangiyal
