माघी पूर्णिमा पर 26 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, मंदिरों में किया पूजन

Maghi Purnima
Last Updated: रविवार, 9 फ़रवरी 2020 (19:59 IST)
(उत्तर प्रदेश)। माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को करीब 26 लाख लोगों ने यहां गंगा और संगम में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं की यह संख्या प्रशासन के 25 लाख के अनुमान से अधिक है। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की। माघी पूर्णिमा का स्नान रविवार सुबह 4 बजे से ही प्रारंभ हो गया, जो शाम लगभग 6 बजे तक चला। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
मेला अधिकारी रजनीश मिश्रा ने बताया, माघी पूर्णिमा पर सौभाग्य योग था जिसे देखते हुए इस स्नान पर्व पर करीब 26 लाख श्रद्धालुओं ने 20 से अधिक घाटों पर स्नान किया। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ स्नान करने वालों को स्नान घाटों तक पहुंचाने में मदद की।

उन्होंने बताया, माघी पूर्णिमा का स्नान रविवार सुबह 4 बजे से ही प्रारंभ हो गया, जो शाम लगभग 6 बजे तक चला। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। मेला क्षेत्र पर 174 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से पैनी नजर रखी जा रही है।

मिश्रा ने बताया, आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एटीएस और एसटीएफ की टीमें सक्रिय रहीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी, आरएएफ के जवान समेत पुलिस और निजी गोताखोर स्नान घाटों पर तैनात रहे।

राजधानी पटना में गंगा तट के काली घाट, कृष्णा घाट, गांधी घाट, पटना कॉलेज घाट समेत विभिन्न घाटों पर आज तड़के से आस्था की डुबकी लगाने वालों का तांता लगा रहा। स्नान के बाद लोगों ने विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और दान किया। मंदिरों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा पूजा-अर्चना करने वालों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व काफी अधिक है। पवित्र नदी में स्नान करने के अलावा सूर्य भगवान की पूजा और दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि इस तिथि पर श्रीहरि गंगा में वास करते हैं। इस वजह से माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व काफी अधिक है।

माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान करने से व्यक्ति की हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस शुभ अवसर पर तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी, मोदक, फल, चरण पादुकाएं, अन्न का दान करना फलदायक होता है। सुबह होते ही श्रद्धालु ‘हर-हर गंगे, जय गंगा मैया, हर-हर महादेव’ के जयकारे के साथ गंगा में डुबकी लगाने लगे।

प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर आदिकाल से माघ मास में कल्पवास की एक माह की परंपरा रही है। पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ एक माह का कल्पवास रविवार को माघी पूर्णिमा के साथ संपन्‍न हो गया।


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