संसद भवन में भी हिन्दी की गूंज

पुनः संशोधित मंगलवार, 25 नवंबर 2014 (19:13 IST)
-शोभना जैन
नई दिल्ली। विश्व भर में इन दिनों सुनी जा रही हिंदी भाषा की गूंज में भी जोरदार तरीके से सुनाई दी। संसदीय हिंदी परिषद द्वारा संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित एक समारोह में राजभाषा हिंदी सहित सभी क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं के प्रचार प्रसार को बढ़ावा दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस बात पर बल दिया गया कि हिंदी को 'जनप्रिय भाषा' बनाए जाने पर जोर दिया जाना चाहिए, ऐसी भाषा जिसे प्रत्येक जन अपनी भाषा के तरह ग्रहण करे।
 
परिषद की अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं विदुषी सरोजिनी महिषी ने इस अवसर पर हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज हिंदी का स्वरूप काफी व्यापक हो चला है। साहित्य, फिल्म, कला, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, संचार, बाजार सभी क्षेत्रों में हिंदी ने अपनी महत्ता कायम की है। विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई होती है। भूमंडलीकरण और बाजारीकरण के चलते हिंदी का व्यापक प्रसार हुआ है।
 
बदलती दुनिया में हिंदी में अनुवाद कार्य से हिंदी की प्रासंगिकता और उपयोगिता का मार्ग और प्रशस्त हुआ है, जिसके चलते हिंदी की पहचान बढ़ी है और गैर हिंदी भाषियों से भी जुड़ी और रोजगार से भी जुड़ी। उन्होंने कहा कि  प्रसन्नता की बात है कि हिंदी का महत्व दिनोंदिन बढ़ रहा है। सुश्री महिषी संसद के केन्द्रीय कक्ष मे पिछले चालीस वर्ष से राष्ट्र भाषा गौरव पुरस्कार समारोह का अयोजन करती आ रही है।
 
उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार प्रसार से निश्चय ही देश में समरसता और एकता मजबूत होती है। सम्मेलन के अध्यक्षता करते हुए जानी मानी साहित्यकार चन्द्रकांता ने कहा मातृभाषा में मौलिक विचार आते हैं। कल्पना के पंख लगते हैं और मौलिक विचार उसी भाषा में हो सकता है जिस भाषा में आदमी सांस लेता है, जीता है। सम्मेलन में हिंदी सेवियों को राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान के अंतर्गत राष्ट्रभाषा गौरव संकलन पुरस्कार श्रीमती उर्मिल सत्यभूषण, राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान अभिषेक पुरस्कार सर्वश्री उमाकांत खुबालकर, मदन साहनी तथा श्रीमती ममता किरण व श्रीमती संतोष बंसल को दिया गया। हिंदी में लेखन के लिए मीडियाकर्मी पुरस्कार जानी मानी लेखिका व दूरदर्शन से जुड़ी रही श्रीमती बिमल इस्सर तथा श्योराजसिंह 'बेचैन' को दिया गया। समारोह में केन्द्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक व अध्यक्ष वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग डॉ. केशरी लाल वर्मा मुख्य अतिथि थे, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. रामेश्वर राय थे। 
 
सम्मेलन में पूर्व केन्द्रीय मंत्री सरोज खापर्डे सहित बड़ी तादाद मे हिंदी प्रेमी और साहित्यकार मौजूद थे। इस मौके पर श्रीमती इस्सर ने कहा कि निश्चय ही इस तरह के आयोजन से हिंदी के प्रचार प्रसार को बल मिलता है। सम्मेलन मे मौजूद अनेक हिंदी प्रेमियों ने विचार व्यक्त किया कि हिंदी को दैनिक कामकाज और व्यवहार में प्रमुखता देनी होगी। तब जाकर हिंदी को सही मायनों में उसका वाजिब दर्जा हासिल होगा। (वीएनआई)  


और भी पढ़ें :