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Last Updated : बुधवार, 11 फ़रवरी 2026 (10:17 IST)

रेप केस के कैदी ने महात्मा गांधी पर लिखा निबंध, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कम कर दी उम्रकैद की सजा

Bombay High Court commutes life sentence for rape convict who wrote essay on Mahatma Gandhi
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बेहद दिलचस्प काम किया है। एक रेप केस का कैदी जिसने महात्मा गांधी पर निबंध लिखा था, कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा घटा दी। हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप के आरोपी की उम्रकैद की सजा घटाकर 12 साल कर दी। यह मामला तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

बता दें कि आरोपी ने जेल में महात्मा गांधी पर निबंध लिखा था, जिससे उसकी सुधार की कोशिशों को माना गया। आरोपी की उम्र अपराध के समय बीस साल थी और उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था।

बता दें कि कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी ने खुद को सुधारने के लिए भी कई प्रयास किए हैं। हालांकि हाई कोर्ट में सुनवाई कर रहे जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने 2 फरवरी के अपने आदेश में 2016 के इस अपराध के लिए व्यक्ति की सजा बरकरार रखी है, लेकिन साथ में यह भी माना कि उसकी उम्रकैद की सजा कम होनी चाहिए।

क्या कहा कोर्ट ने अपने फैसले पर : बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने यह आदेश दोषी की ओर से विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट की दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर दिया था। कोर्ट ने नोट किया कि अपराध के समय दोषी की उम्र केवल 20 साल थी और उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वह दिसंबर 2016 से लगातार हिरासत में है और कोविड-19 महामारी के दौरान भी उसे रिहा नहीं किया गया था।

इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट ने कैदी की शैक्षिक गतिविधियों पर भी नजर डाली। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि जेल के अंदर निबंध प्रतियोगिता में उसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर भी निबंध लिखा था। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि हमारी राय में 12 साल की सजा न्याय के उद्देश्यों को पूरा करेगी। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि दोषी की ओर से पहले ही जेल में बिताई गई अवधि को उसकी इस कम की गई सजा में से घटा दिया जाएगा।

क्या और कब की है घटना : घटना 9 दिसंबर 2016 की है। पांच साल की पीड़िता पानी लेने के लिए एक पड़ोसी के घर गई थी, जहां आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया। डरी हुई बच्ची ने तुरंत अपने परिवार को इस घटना के बारे में बताया, जिसके बाद परिवार ने आरोपी की पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बाद में आठ साल की उम्र में ट्रायल कोर्ट में गवाही दी। हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की की गवाही को विश्वसनीय और सुसंगत पाया था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि उसने बिना किसी के सिखाए-पढ़ाए पूरी घटना बताई।
Edited By: Naveen R Rangiyal 
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