विचार कुंभ : परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा के अनुसार सारे जीव सृष्टि की संतानें हैं। मनुष्यता का संस्कार देने वाली सृष्टि है। मध्यप्रदेश में कुंभ की वैचारिक परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है। आज विश्वभर के चिंतक, विचारक एक हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से कहा गया है कि सनातन परंपरा में इन सत्यों की बहुत पूर्व से जानकारी है। आज के परिप्रेक्ष्य में हमें सनातन मूल्यों के प्रकाश में विज्ञान के साथ जाना होगा। यह करके विश्व की नई रचना कैसी हो, इसका मॉडल अपने देश के जीवन में देना होगा।
जूना पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि अगली सदी भारत की सदी है, क्योंकि जब पश्चिम की उपभोक्तावादी संस्कृति थक जाएगी, तब भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी। भारत की भूमि से ही आध्यात्मिक मार्ग निकलेगा, जो विश्व का मार्गदर्शन करेगा।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की 2 विशेषताएं प्रधान हैं- कर्म की स्वायत्तता और चिंतन की स्वतंत्रता। मनुष्य का संकल्प जैसा होगा, उसकी सिद्धि भी वैसी ही होगी। संकल्प की पवित्रता से सकारात्मकता आती है।
उन्होंने कहा कि विश्व में गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए अच्छा वातावरण उत्पन्न करने की आवश्यकता है। अधिकारों के प्रति जाग्रति तो बढ़ी है, परंतु कर्तव्यों के प्रति विस्मृति भी बढ़ी है। वर्तमान समय में परोपकार की प्रवृत्ति पैदा करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यह विश्व को अधिक से से अधिक वृक्ष लगाने और पृथ्वी को हरा-भरा बनाने का संदेश देगा। उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे वृहद वृक्षारोपण का आह्वान किया ताकि हरित क्षेत्र बढ़ सके। चिदानंद स्वामी ने कहा कि नदियों के किनारे इतने पेड़ लगाएं कि हरित क्षेत्र बन जाए। जन्मदिन पर पेड़ लगाएं और पेड़ लगाने का बहाना तलाशें।
योग गुरु और पतंजलि आयुर्वेद के प्रमुख बाबा रामदेव ने कृषि एवं कुटीर उद्योग पर चर्चा करते हुए कहा कि देश की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए कुटीर उद्योग की वस्तुओं को अपनाना होगा। कुटीर उद्योग का बहुत बड़ा क्षेत्र है और यह आवश्यक है कि इसे आम जनता प्रोत्साहित करे।

उन्होंने कहा कि अगर हम हाथ से बने सामान का ही उपयोग करने लगें, तो इसका लाभ कर्मकारों के साथ देश को भी होगा, क्योंकि तब देश की मुद्रा बाहर नहीं जाएगी। हमें सूती कपड़े पहनने चाहिए, जिससे भारतीय बुनकरों, कामगारों को काम मिल सके।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनाई जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे भी कुटीर उद्योग की ओर बढ़ें और जो लोग प्रशिक्षण हासिल करके शैम्पू, साबुन आदि बनाना चाहते हैं, उन्हें वे प्रशिक्षण देंगे।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने कहा कि जीवन को सुलभ और सरल बनाने के लिए भारतीय पुरातन शास्त्रों का परायण करना चाहिए। 'सर्वे भवन्तु सुखिन:' की अवधारणा का पालन का करना चाहिए। अच्छे के साथ अच्छा और बुरे के साथ भी अच्छा करना चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विचार महाकुंभ के उद्देश्य की चर्चा करते हुए कहा कि कुंभ का संबंध ही विचार-मंथन से है। उन्होंने कहा कि संतों की विचार प्रक्रिया से कल्याणकारी राज्य का कल्याण हो, यही उद्देश्य है। भारत में सभी तरह के विचारों, विचार-प्रक्रियाओं और दर्शन का आदर किया गया है। सभी को पर्याप्त आदर और सम्मान है। आज के समय में सबसे बड़ी चिंता यह है कि मानव जीवन गुणवत्तापूर्ण कैसे हो। कौन से तरीके और व्यवहार हैं जिनसे मानव जीवन सुखी और अर्थपूर्ण बन सकता है। विज्ञान और आध्यात्मिकता या दोनों के परस्पर मेल से यह संभव है इसलिए इस पर विचार करना आवश्यक है। विज्ञान और अध्यात्म दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग, परंपरागत खेती, मूल्य आधारित जीवन, धर्म और अध्यात्म जैसे विषयों का वैश्विक महत्व है।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता के सूत्र शक्तिरूपा महिलाओं हाथ में सौंपेंगे। पुलिस सहित अन्य विभागों की भर्ती में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। अगले शैक्षणिक सत्र से शिक्षा के पाठ्यक्रम में महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान, संवेदनशीलता के पाठ शामिल किए जाएंगे। किसी भी विज्ञापन में नारी देह के प्रदर्शन को प्रतिबंधित किया जाएगा और इसके लिए हम कानून भी बनाएंगे। महिला मजदूरों को समान कार्य का समान वेतन दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में शराब की कोई भी नई दुकान नहीं खोली जाएगी और नशामुक्ति अभियान चलाया जाएगा। राज्य को शक्ति प्रदेश बनाएंगे जिसमें महिलाओं को संपूर्ण अधिकार दिए जाएंगे। बेटा-बेटी बराबर हैं, यह जनअभियान चलाया जाएगा।

साध्वी ऋतम्भराजी ने कहा कि नारी निकेतन किसी समस्या का हल नहीं है। नारी को आंतरिक और बाहरी रूप से सशक्त बनाने के लिए नीति बनाने की आवश्यकता है। महिलाओं को रोटी कमाने लायक बनाएं।

मृदुला सिन्हा ने कहा कि महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं की महती आवश्यकता है। शिक्षा पाठ्यक्रमों में नारी उत्थान के पाठ शामिल किए जाने चाहिए। बच्चों को चाहिए कि वे माता-पिता को वृद्धाश्रम नहीं भेजें। उन्होंने कहा कि विवाह करना अनिवार्य नहीं, बल्कि आवश्यक है। इस संबंध को निभाना चाहिए।




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