अटलबिहारी वाजपेयी : भारतीय राजनीति के अजातशत्रु

पुनः संशोधित बुधवार, 25 दिसंबर 2019 (11:52 IST)
घोर घृणा में, पूत प्यार में
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में
जीवन के शत-शत आकर्षक
अरमानों को ढलना होगा
कदम मिलाकर चलना होगा।
ओजस्वी और प्रखर वक्ता, जिनकी वाणी में सरस्वती वास करती थीं, ऐसे हमारे श्रद्धेय अटलबिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 'सुशासन दिवस' पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन!

देश की नदियों को परस्पर जोड़कर जल की शक्ति को भविष्य के सशक्त भारत के निर्माण में लगाने का सपना देखने वाले भविष्यद्रष्टा, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी वाजपेयीजी के चरणों में प्रणाम। आप युगों-युगों तक राष्ट्र उत्थान के लिए हम सबको सतत प्रेरित करते रहेंगे।
विश्व के कई देशों के आंखें दिखाने के बावजूद परमाणु विस्फोट कर भारत की शक्ति और दृढ़ निश्चय से संसार को अवगत कराने वाले अटलजी कभी किसी के दबाव में नहीं आए और न ही उन्होंने स्वहित के लिए राष्ट्रहित के किसी मुद्दे पर समझौता किया।

ऐसे सशक्त नेता को प्रणाम! अटलजी ने प्रधानमंत्री रहते हुए संवाद को हमेशा तरजीह दी। सवालों के जवाब दिए और विपक्ष को न केवल चुप कराया बल्कि तथ्यों से अवगत कराकर उन्हें अपने साथ भी कर लिया।
उनकी इस अद्भुत शैली को नरेंद्र मोदी और अमित शाह आत्मसात कर आगे बढ़ा रहे हैं। सौहार्द और भाईचारे की नई पौध सिंचित कर भारत को नई दिशा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी की नीतियां न केवल तत्कालीन भारत के लिए अभूतपूर्व थीं, बल्कि भविष्य के सशक्त, समृद्ध और वैभवशाली भारत के लिए भी है। ऐसे पुरुष युगों में जन्म लिया करते हैं।

विचारों के धनी अटलजी आज़ादी के पहले अंग्रेजों से लड़ते हुए और आज़ादी के बाद आपातकाल में भी जेल गए, लेकिन विचारों से कभी समझौता नहीं किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक और उपयोगी हैं। धन्य है भारत की धरती, जिस पर अटलजी जैसे महान व्यक्तित्व ने जन्म लिया।

अटलजी देश के ऐसे नेता हैं, जो करोड़ों-करोड़ लोगों के आदर्श व प्रेरणास्रोत हैं। मैं भी उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उनके क्रांतिकारी विचारों को आत्मसात कर उनके दिखाए मार्ग पर चलकर देश के नवनिर्माण में अपना संपूर्ण योगदान देने के लिए संकल्पित हूं। भारत रत्न को नमन।
(भारत रत्न अटलजी की जन्म जयंती पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का ब्लॉग)



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