0

अपनी शर्तों पर पत्रकारिता करते थे विनोद मेहता...

रविवार,मार्च 8, 2015
0
1
विनोद मेहता का जाना भारतीय पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। भारतीय पत्रकारिता में परंपरा और प्रोफेशन के बीच कुशल संयोग आज के समय में कम ही दिखाई दे रहे हैं ऐसे समय में उनका खामोश हो जाना निश्चित रूप से आघात है।
1
2
क्या आपने कभी सुना है कि कोई व्यक्ति या जोड़ा घूम-घूमकर लोगों के घरों में दीवारों पर चित्र बनाता है और बदले में कुछ नहीं मांगता! पेंटिंग बनाने की यह सनक आखिर कैसी कहानी है और इसकी वजह क्या है?
2
3

Sangeeta Gupta an artist

मंगलवार,नवंबर 11, 2014
Film Maker and an artist, Sangeeta Gupta started her artistic journey with intricate drawings. Her real calling was discovered in her abstracts in oils and acrylics on canvas. Her solo shows (2003, 2004, 2006 & 2007) with Kumar Gallery launched ...
3
4
अभी तक माना जाता था कि फिल्मी पत्रकारिता सिर्फ गॉसिप पर टिकी पत्रकारिता होती है। ऐसे में यदि किसी ने फिल्मी पत्रकारिता को गंभीर पत्रकारिता का स्वरूप दिया है तो उसमें अजय ब्रह्मात्मज का नाम अग्रणी पत्रकारों में शुमार किया जाएगा। उन्होंने अपने लेखन, ...
4
4
5

मदनमोहन जोशी, भाषा का जादूगर

बुधवार,अक्टूबर 8, 2014
मदनमोहन जोशी! यह नाम इतना ही लिख देना काफी है। पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में लोग एकदम जान जाते हैं कि कौन है यह शख्स। कहने का मतलब यह है कि मदनमोहन जोशी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।
5
6
विजयदत्त श्रीधर हिन्दी के ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी निष्कलुष पत्रकारिता, लेखकीय कृ‍तित्व और सर्जना से भारतीय पत्रकारिता के युगपुरुषों की परंपरा को न केवल आगे बढ़ाया बल्कि शोधपरक सर्जनात्मक अवदान से समृद्ध किया है। पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को ...
6
7

एनके सिंह : पाठकों के संपादक

बुधवार,अक्टूबर 8, 2014
चालीस साल से अधिक लंबी यात्रा पत्रकारिता में तय कर चुके नरेन्द्र कुमार सिंह (एनके सिंह) हमेशा समाज से जुड़े रहे हैं। व्यावसायिक पत्रकारिता के इस दौर में भी उनकी पत्रकारिता में सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते हैं। दैनिक भास्कर, पीपुल्स समाचार, ...
7
8

निधि कुलपति : सबसे सौम्य

सोमवार,अक्टूबर 6, 2014
निधि कुलपति टेलीविजन की उन न्यूज एंकर्स में से हैं, जिनको दिखते हुए लोग अपना चैनल नहीं बदलते। भूत, भभूत, लंगोट, नाग, नागिन, बलात्कार, शीला और मुन्नी जैसे मुद्दों पर टीआरपी बटोरने वाले चैनल भी उनके सामने टिक नहीं पाते। कुदरत उन पर मेहरबान रही है और ...
8
8
9
आप सबने निश्चित ही चमत्कारी पत्‍थर पारस की खूबी के बारे में सुना होगा। पारस से जंग लगे लोहे को स्पर्श भी करा दिया जाए तो वह चौबीस कैरेट का खरा सोना बन जाता है। पत्रकारिता और साहित्य के क्षे‍त्र में विष्णु नागर ऐसा ही एक नाम है। उन्होंने जिस काम को ...
9
10

राहुल देव : भाषा का सिपाही

रविवार,अक्टूबर 5, 2014
पत्रकारिता के गिरते मूल्यों और घटती साख के बीच राहुल देव एक ऐसा नाम है, जो पत्रकारिता के सामाजिक सरोकारों और भारतीय भाषाओं के वजूद के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहा है। हिन्दी पत्रकारिता में राहुल देव का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।
10
11
हिन्दी पत्रकारिता और बेहतर संपादकों की जब बात चलती है तो अहम हस्ताक्षर विश्वनाथ सचदेव को हर कोई बरबस याद करता है। पाकिस्तान के साहीवाल में 2 फरवरी 1942 को जन्मे सचदेव ने एमए अंग्रेजी साहित्य में राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से किया और पत्रकारिता की ...
11
12

हरिवंश : पढ़ाकू संपादक

शनिवार,अक्टूबर 4, 2014
बात कुछ वर्ष पुरानी है। देश की राजधानी दिल्ली के पत्रकारिता गलियारे में एक पत्रकार मंडली के बीच यह सवाल उठा कि आज के समय में सबसे अधिक पढ़ने वाले संपादक कौन हैं? उस वक्त दो नाम सामने आए थे। पहला नाम था हिन्दु्स्तान की संपादक मृणाल पांडे का और दूसरा ...
12
13
के. विक्रम राव ने पत्रकारों के लिए संघर्ष करते हुए पत्रकारिता की। प्रेस परिषद में रहकर मीडिया के नियमन जैसे कार्यों में भागीदारी की तो प्रेस सेंसरशिप के विरोध में 13 महीने तक जेल में भी गुजारे। श्रमजीवी पत्रकारों के वेतन के लिए सरकारों से लंबी लड़ाई ...
13
14

शशि शेखर : सक्रिय संपादक

गुरुवार,अक्टूबर 2, 2014
फर्ज करें कि पंद्रह वर्ष की आयु में कपड़ा बेचने वाला बालक क्या देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित घराने के अखबार का समूह संपादक बन सकता है? फर्ज करें कि हिन्दी की प्रिंट पत्रकारिता में कोई व्यक्ति कितनी उम्र में पत्रकारिता में आता है या फिर कितनी उम्र ...
14
15

मृणाल पांडे : जारी है सफर

गुरुवार,अक्टूबर 2, 2014
वो पत्रकार हैं, लेखक हैं, कहानीकार हैं, संपादक हैं, निबंधकार हैं, पिछले 47 सालों से वे पत्रकारिता कर रही हैं। जब वो लिखती हैं, तो लगता है जैसे शब्दों को उनके मायने मिल गए हैं। जब 21 साल की थीं, तो हिन्दी साप्ताहिक 'धर्मयुग' में उनकी पहली कहानी छपी ...
15
16

विनोद दुआ : आला ब्रॉडकास्टर

बुधवार,अक्टूबर 1, 2014
'एक हम अकेले हैं, जो देश के लिए खाते हैं' टीवी पर उनके ये शब्द आम से लेकर खास तक, उनकी पहचान बन गए हैं। वे 40 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं, सही शब्द का सही जगह पर इस्तेमाल करने में वे माहिर हैं। सवाल करने वालों का परिचय टीवी पर जिस अंदाज में कराते ...
16
17

ओम थानवी : सरल हृदय संपादक

बुधवार,अक्टूबर 1, 2014
ओम थानवी 'जनसत्ता' दैनिक के यशस्वी संपादक हैं। वे अच्‍छे लेखक भी हैं। 'अनंतर' स्तंभ में वे अच्‍छे वृत्तांत लिखते हैं। वे सा‍हित्यिक कृतियों का संपादन भी अच्‍छा करते हैं। उनके द्वारा दो खंडों में संपादित 'अपने-अपने अज्ञेय' इस बात का अनुपम उदाहरण है।
17
18
हमारे समय के बेहद महत्वपूर्ण संपादक, पत्रकार, लेखक, पत्रकार संगठनों के अगुआ, शिक्षाविद, आयोजनकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता जैसी अच्युतानंद मिश्र की अनेक छवियां हैं। उनकी हर छवि न सिर्फ पूर्णता लिए हुए है वरन लोगों को जोड़ने वाली साबित हुई है। उन्हें ...
18
19

राम बहादुर राय : बहादुर कलम

सोमवार,सितम्बर 29, 2014
जिस दौर की पत्रकारिता की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता पर ढेरों सवाल हों, ऐसे समय में राम बहादुर राय की उपस्थिति हमें आश्वस्त करती है कि सारा कुछ खत्म नहीं हुआ है। सही मायने में उनकी मौजूदगी हिन्दी पत्रकारिता की उस परंपरा की याद दिलाती है, जो बाबूराव ...
19