मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
  1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Two tigers died due to electrocution in Shahdol, Madhya Pradesh.
Last Updated : मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (11:46 IST)

टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश बना बाघों का कब्रगाह, एक महीने में 9 बाघों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

Two tigers died due to electrocution in Shahdol
भोपाल। टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश अब बाघों की कब्रगाह बन गया हैं। वन विभाग के लाख दावों के बाद भी प्रदेश में बाघों की संदिग्ध मौत का सिलसिला लगातार जारी हैं। बाघों के कथित शिकार का ताजा मामला शहडोल में आया है, जहां उत्तर वन मंडल के अंतर्गत जयसिंहनगर रेंज में एक साथ दो बाघों, एक नर और एक मादा के शव बरामद हुए हैं। वन विभाग के मुताबिक दोनों बाघों की मौत करंट लगने से हुई है।

वन विभाग के अनुसार किसानों द्वारा जंगली जानवरों से फसल की रक्षा के लिए खेतों के चारों ओर अवैध रूप से बिछाए गए करंट वाले तार की चपेट में आने एक नर और एक मादा बाघिन की मौत हो गई है। दोनों बाघों के शव करपा बीट के मसिरा सर्किल (आरएफ 382 क्षेत्र) के पास एक-दूसरे से लगभग 100-200 मीटर की दूरी पर मिले। वहीं वन विभाग ने डॉग स्क्ववॉड की मदद से 5 आरोपियों को  गिरफ्तार कर लिया हैं।

मध्यप्रदेश में बाघों की लगातार मौतों ने बाघों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। साल 2026 के शुरुआती दिनों में अब तक 9 बाघों की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में मध्य प्रदेश में देश में सबसे अधिक 55 बाघों की मौत हुई थी, जिसमें 10 बाघों की मौत करंट से हुई थी। प्रदेश में 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक संख्या है।

बाघों का कब्रगाह बना टाइगर स्टेट-प्रदेश में बीते 10 सालों में 365 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है। इसमें 2025 में 55, वर्ष 2024 में 46, वर्ष 2023 में 45, वर्ष 2022 में 43,  2021 में अब तक 36, 2020 में 30, 2019 में 29, 2018 में 19, 2017 में 27 और 2016 में 34 बाघों की मौत हुई थी। दरअसल मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 बाघों के लिए काल साबित हुआ है, जिसमें रिकॉर्ड 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौतों में से एक बड़ा हिस्सा अस्वाभाविक कारणों से जुड़ा है।
 

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे कहते है कि बिजली के करंट से एक नर और एक मादा बाघ की मौत होना और एक शावक का लापता होना वन विभाग की लापरवाही को दिखाता है। वह कहते है कि बाघों की लगातार मौत के बाद वन विभाग में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। उन्होंने वाइल्डलाइफ चीफ शुभरंजन सेन को तत्काल हटाने की मांग की है।

बाघों की मौत पर हाईकोर्ट का सख्त रूख-मध्यप्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों का मामला हाईकोर्ट पहले ही पहुंच चुका है और इस मामले पर हाईकोर्ट अगली सुनवाई 11 फरवरी को करेगा। प्रदेश में बाघों की लगातार हो मौतों को दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने केंद्र सरकार,राज्य के मुख्य सचिव और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने विशेष रूप से यह पूछा है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों के बावजूद अब तक कितने दोषियों को सजा मिली है और सुरक्षा के क्या पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

टाइगर स्टेट का दर्जा छिनने का खतरा-प्रदेश में लगातार हो रही बाघों की मौत से मध्यप्रदेश से टाइगर स्टेट का दर्जा छीनने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना में भारत में करीब 3682 बाघ की पुष्टि हुई, जिसमें सर्वाधिक 785 बाघ मध्य प्रदेश में होना पाए गए। मध्य प्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं, जिसमें (कान्हा किसली, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना बुंदेलखंड, सतपुड़ा नर्मदापुरम, संजय दुबरी सीधी, नौरादेही, माधव नेशनल पार्क और डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी) शामिल हैं। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक बाघ हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में अगर बाघों की ऐसे मौत होती रही तो मध्यप्रदेश अपना टाइगर स्टेट का दर्जा भी खो सकता है।विशेषज्ञों के मुताबिक बाघों की टेरिटोरियल फाइट की बड़ी वजह वन क्षेत्रफल का लगातार घटता रकबा है। वैसे तो टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश 77,482 वर्ग किलोमीटर के साथ सार्वक्षिक वन क्षेत्रफल वाला राज्य है लेकिन वनक्षेत्रफल का लगातार घटता रकबा और अतिक्रमण इसकी बड़ी वजह है। रिपोर्ट के मुताबिक बाघों की मौत के पीछे स्थानीय स्टाफ की लापरवाही और शिकारियों से मिली भगत बड़ी वजह हैं। वन विभाग के हाथ कुछ ऐसे सबूत लगे हैं, जिससे यह पता चलता है कि यहां के स्थानीय शिकारी अंतरराष्ट्रीय तस्करों के संपर्क में हैं। यहां से पकड़े गए कई शिकारियों के बैंक खातों में इंटरनेशनल मनी ट्रांसफर के भी सबूत मिले हैं।