गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
  1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. मध्यप्रदेश
  4. Mohan government is preparing to implement Uniform Civil Code in Madhya Pradesh
Last Modified: बुधवार, 8 अप्रैल 2026 (18:53 IST)

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने की तैयारी में मोहन सरकार, दिवाली से पहले हो सकता है एलान

समान नागरिक संहिता को लागू करने पर कांग्रेस ने जताया एतराज

Mohan government preparing to implement Uniform Civil Code in Madhya Pradesh
मध्यप्रदेश में मोहन सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की ओर आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों के साथ औपचारिक चर्चा में यूसीसी को लेकर उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अध्ययन करने की बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिन राज्यों में यूसीसी लागू किया गया है वहां के मॉडल का अध्ययन किया जाए। वहीं मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस कमेटी में सीनियर मंत्रियों के साथ गृह विभाग के आला अधिकारी भी शामिल हो सकते है। 
 
प्रदेश में यूसीसी लागू करने से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम के कानूनों का अध्ययन किया जाएगा. उत्तराखंड में जहां विवाह‑तलाक पंजीयन और लिव‑इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, वहीं गुजरात और असम में सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए अलग‑अलग प्रावधान किए गए हैं। बताया जा रहा है कि मोहन सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी बिल को ला सकती है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभ चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में यूसीसी लागू करने की बात कही थी। वहीं चुनाव राज्य असम में भी भाजपा की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एलान किया है कि चुनाव में जीत हासिल होते ही पहली कैबिनेट बैठक में UCC लागू करने का  निर्णय लिया । गौरतलब है कि 2024 के  लोकसभा चुनाव के दौरान  गृहमंत्री अमित शाह ने एलान किया था कि अगले पांच साल में देश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। 
 
कांग्रेस ने जताई आपत्ति-वहीं प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारियों पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिना सामाजिक सहमति के संवेदनशील मुद्दों पर जल्दबाजी कर रही है. खासकर आदिवासी समाज की परंपराओं को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फैसला सभी वर्गों को विश्वास में लेकर ही होना चाहिए। यूसीसी में किसी भी समाज, खासकर आदिवासी समुदाय का अपमान नहीं होना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के पास पहले से कई कानून लंबित हैं, जिन पर ध्यान देने के बजाय नया विवाद खड़ा किया जा रहा है।
 
भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार- वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से नकारा दिया है। मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी आरंभ की है। भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने तो अपने दौरे के दौरान कई राज्यों में सीधे कहा है कि इस कानून को लागू करना चाहिए। देश में लगातार जनसंख्या वृद्धि हो रही है और एक कौम 5 बीवी और 25 बच्चे पैदा करके आबादी का नया संकट खड़ा करना चाहते हैं। UCC कानून लागू होने से इस संकट से भी निपटा जा सकता है। देश में सभी को समान शिक्षा चाहिए, समान रोजगार चाहिए, समान रूप से योजनाओं का लाभ चाहिए तो देश में सबके लिए समान कानून भी होना चाहिए. कांग्रेस का तो यह पुराना नारा है कि बच्चे दो ही अच्छे तो कांग्रेस को तो UCC का समर्थन करना ही चाहिए. अतः मध्य प्रदेश सरकार ने UCC लागू करने की मुहिम आरंभ की है तो इसके लिए मध्य प्रदेश की सरकार बधाई की पात्र है. जल्द से जल्द यह बिल लाया जाए यह मध्य प्रदेश और पूरे देश की मांग है. यह बिल देश और प्रदेश की प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
 
वही्ं कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में एकरूपता कायम होने से कांग्रेस को परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा धर्म और जाति की राजनीति की, जबकि यूसीसी समाज को जोड़ने वाला कानून है।
 
क्या है समान नागरिक संहिता?-समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून। चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एक निष्पक्ष कानून है, जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है।समान नागरिक संहिता पूरे देश के लिए एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण कानूनों में भी एकरूपता प्रदान करने का प्रावधान करती है।
 
संविधान के आर्टिकल 36 से 51 के माध्यम से राज्य को कई मुद्दों पर सुझाव दिए गए हैं। इनमें से आर्टिकल 44 राज्य को सभी धर्मों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का निर्देश देता है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। वर्तमान में मुस्लिम और हिन्दू लॉ में तलाक और विवाह संबंधी कानून अलग-अलग हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार पूरे भारत के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की बात कही गई है। दरअसल समान नागरिक संहिता भाजपा के चुनावी एजेंडे में भी शामिल है और पिछले देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है।
ये भी पढ़ें
ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद कश्मीर और लद्दाख में मना जश्‍न, CM उमर अब्दुल्ला समेत क्‍या बोले क्षेत्र के दिग्गज नेता?